बेंगलुरु/मैसूर। कर्नाटक में गन्ना किसानों के जारी आंदोलन और राज्य में सूखे की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए समय मांगा है, ताकि गन्ना उत्पादकों की समस्याओं और सूखा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को भी साथ लेकर चलना चाहते हैं। इसके लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मुलाकात करेगा और किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास करेगा। रविवार, 18 अक्टूबर को मैसूर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे गन्ना किसानों से विरोध प्रदर्शन वापस लेने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए मांगा समय

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का समय मांगा है। इस बैठक में गन्ना किसानों की मांगों के साथ राज्य में सूखे की स्थिति पर चर्चा की जाएगी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, कई समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार का सहयोग आवश्यक है। विशेष रूप से गन्ने की कीमत और सूखा राहत से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर काम करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान कर्नाटक के किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से मुलाकात की तारीख तय किए जाने की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

विपक्षी नेताओं को भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने का न्योता

डी.के. शिवकुमार ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में विपक्षी दलों के नेताओं को भी शामिल करना चाहते हैं।

उनके अनुसार, राज्य के किसानों से जुड़ी समस्याओं पर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि विपक्षी दलों के नेताओं ने पहले भी सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की इच्छा जताई थी।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी विपक्षी नेता किसानों के हित में प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनेंगे।

मुख्यमंत्री का कहना है कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

गन्ना किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील

कर्नाटक में गन्ने के लाभकारी मूल्य को लेकर किसान संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारियों से अपना विरोध प्रदर्शन वापस लेने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है और बातचीत का रास्ता खुला हुआ है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह किसानों की मांगों का राजनीतिक लाभ उठाने के पक्ष में नहीं हैं।

उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर उठाया जाएगा।

गन्ने के बेहतर मूल्य की मांग पर अड़े किसान

कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों में गन्ना उत्पादक किसान अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं।

किसान संगठनों का कहना है कि खेती में मजदूरी, खाद, उर्वरक, सिंचाई और परिवहन की लागत लगातार बढ़ रही है।

इसके मुकाबले गन्ने से होने वाली आय उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।

आंदोलनकारी किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने के लाभकारी मूल्य में वृद्धि और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य की समीक्षा शामिल है।

किसान चाहते हैं कि सरकार मूल्य निर्धारण से संबंधित समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले।

मुख्यमंत्री की अपील के बावजूद पदयात्रा जारी

गन्ना किसानों के आंदोलन को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार की ओर से पहले भी बातचीत का प्रयास किया गया था।

इसके बावजूद किसान संगठनों ने अपनी पदयात्रा जारी रखने का निर्णय लिया है।

रविवार को किसानों की पदयात्रा धारवाड़ जिले में पहुंच गई। आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि जब तक गन्ने के मूल्य और अन्य मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री की नई अपील के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किसान संगठन अपने आंदोलन को लेकर क्या निर्णय लेते हैं।

सूखे की समस्या भी प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे

मुख्यमंत्री ने गन्ना किसानों के अलावा राज्य में सूखे की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात के दौरान सूखे और उससे प्रभावित किसानों की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी।

कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां वर्षा पर निर्भर हैं। ऐसे में वर्षा की कमी किसानों की फसलों, सिंचाई और कृषि आय को प्रभावित कर सकती है।

सूखे की स्थिति में किसानों को फसल नुकसान, पानी की कमी और उत्पादन लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, वर्तमान सूखा प्रभावित जिलों की संख्या और नुकसान का अंतिम आकलन संबंधित सरकारी रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

केंद्र सरकार के सहयोग को बताया जरूरी

डी.के. शिवकुमार ने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याओं और सूखा राहत जैसे मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र सरकार का सहयोग आवश्यक है।

गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य तथा चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य से संबंधित नीतियों में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इसके अलावा आपदा प्रबंधन और सूखा राहत से जुड़े मामलों में भी केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है।

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री से मुलाकात होने पर कर्नाटक से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाया जाएगा।

केंद्र ने किसानों की मांगों पर बनाई समिति

इस बीच केंद्र सरकार ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों की मांगों का अध्ययन करने के लिए पूर्व नीति आयोग सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है।

इस समिति का उद्देश्य गन्ने के लाभकारी मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य सहित किसानों की प्रमुख समस्याओं की समीक्षा करना है।

समिति से प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की नीतिगत कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि, समिति के गठन के बावजूद किसानों की मांगों पर अंतिम समाधान अभी सामने नहीं आया है।

किसानों के हितों पर राजनीति नहीं करने की बात

मैसूर हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को गन्ना उत्पादकों के साथ अन्य फसल उगाने वाले किसानों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।

गन्ने के समर्थन मूल्य में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त आर्थिक योगदान देने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर चर्चा की जा सकती है।

उन्होंने संकेत दिया कि कोई भी निर्णय लेते समय राज्य की वित्तीय स्थिति और सभी वर्गों के किसानों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना जरूरी होगा।

सर्वदलीय बैठक से समाधान की उम्मीद

मुख्यमंत्री के प्रधानमंत्री से मुलाकात के प्रस्ताव के बाद अब सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के गठन पर नजर बनी हुई है।

यदि विपक्षी दलों के नेता इस पहल में शामिल होते हैं, तो राज्य के किसानों की मांगों को केंद्र सरकार के सामने संयुक्त रूप से रखने का अवसर मिलेगा।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात कब होगी और प्रतिनिधिमंडल में किन-किन दलों के नेता शामिल होंगे।

सरकार और किसानों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण

कर्नाटक में गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की इस पहल को राज्य और केंद्र सरकार के बीच संवाद बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

एक ओर किसान बेहतर मूल्य की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार उनसे आंदोलन समाप्त करके बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रही है।

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित मुलाकात और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के गठन पर सभी की नजरें टिकी हैं।

इस बैठक में गन्ने की कीमत, सूखा राहत और किसानों की अन्य समस्याओं पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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