बेंगलुरु: सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली परियोजनाओं में से एक, 'शॉर्ट टनल रोड' (छोटी सुरंग सड़क) को शुक्रवार को एक झटका लगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की चेन्नई स्थित दक्षिणी ज़ोन बेंच, जो इस परियोजना के लिए 1,128 पेड़ों को काटे जाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, ने कर्नाटक सरकार को पेड़ काटने से रोकने का आदेश दिया है।

यह आदेश केवल हेब्बल झील और उसके आसपास के इलाकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रस्तावित टनल रोड परियोजना के पूरे हिस्से पर लागू होता है। यह रोक तब तक बनी रहेगी जब तक कि मूल आवेदन का निपटारा नहीं हो जाता। काटे जाने वाले पेड़ 70 से अधिक प्रजातियों के हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।

 NGT की इस बेंच में न्यायिक सदस्य जस्टिस पुष्पा सत्यनारायण और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. प्रशांत गर्गव शामिल थे, जो इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। आवेदकों की ओर से वकील सौरभ शर्मा और वी. अनंत कृष्णन पेश हुए, जबकि कर्नाटक सरकार की ओर से वकील विक्रम सिम्हा और वेटलैंड अथॉरिटी (आर्द्रभूमि प्राधिकरण) की ओर से वकील वसंत पेश हुए।

322 पन्नों की रिपोर्ट में परियोजना का विवरण, हेब्बल झील की 3.45 एकड़ ज़मीन के इस्तेमाल की जानकारी, और 'कर्नाटक वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976' के तहत वृक्ष अधिकारियों के साथ हुई बातचीत का ब्योरा शामिल था। इसमें अलग-अलग आवेदकों द्वारा की जा रही सुनवाई की जानकारी भी दी गई थी। सुनवाई के दौरान NGT के सामने ड्राइंग (नक्शों) के साथ ये विवरण पेश किए गए।

यह भी बताया गया कि हेब्बल झील के आसपास बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने, खुदाई करने, पानी निकालने (डी-वॉटरिंग), निर्माण कार्य से होने वाले प्रदूषण, सतह के जल निकासी तंत्र में बदलाव, और जल धाराओं के उपयोग या उनके मार्ग को बदलने का काम, वेटलैंड अथॉरिटी से बिना अनुमति लिए ही आगे बढ़ाया जा रहा है।

 

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