Amazon को बॉम्बे HC की सख्ती एक्सपायर्ड सामान FDA की निगरानी में होगा नष्ट

एक्सपायर्ड सामान मामले में Amazon को झटका बॉम्बे HC ने FDA को सौंपी जिम्मेदारी

Update: 2026-08-11 03:02 GMT
मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने Amazon Retail India को महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित अपने गोदाम में रखे सभी एक्सपायर और खराब हो चुके सामान को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि इन वस्तुओं का निस्तारण कानून के मुताबिक वैज्ञानिक तरीके से किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया का खर्च एमेजोन को उठाना होगा।
अदालत का यह आदेश ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले इसी मामले में हाई कोर्ट ने FDA की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने नियामक से कहा था कि नियमों को लागू करते समय कार्रवाई संतुलित और व्यवस्थित तरीके से की जानी चाहिए।
भिवंडी गोदाम से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी स्थित एमेजोन के गोदाम से जुड़ा है। FDA ने आरोप लगाया था कि गोदाम में रखे कुछ एक्सपायर खाद्य उत्पादों को नष्ट करने के बजाय खुदरा बाजार में भेजे जाने का प्रयास किया गया। इसके बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने गोदाम के खिलाफ कार्रवाई की और उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया। एमेजोन ने इस कार्रवाई को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
पहले FDA की कार्रवाई पर कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
इस मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई के तरीके पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि किसी समस्या से निपटने के लिए जरूरत से ज्यादा कठोर कदम उठाना उचित नहीं है। कोर्ट की टिप्पणी का सार यह था कि नियामक को नियमों का पालन कराने के लिए व्यवस्थित और अनुपातिक कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि, अब अदालत ने एक्सपायर और खराब सामान के सुरक्षित निस्तारण को लेकर स्पष्ट अंतरिम व्यवस्था तय कर दी है।
एमेजोन को बनानी होगी सामान की पूरी सूची
हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, एमेजोन को भिवंडी गोदाम में मौजूद सभी एक्सपायर और खराब हो चुके सामान की पूरी सूची तैयार करनी होगी। इसके बाद यह सामान संबंधित FDA अधिकारी को सौंपा जाएगा। FDA इन वस्तुओं को लागू कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत नष्ट या निस्तारित करेगा। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उपयोग की अवधि पूरी कर चुके खाद्य उत्पाद किसी भी तरह दोबारा बाजार या उपभोक्ताओं तक न पहुंचें।
निस्तारण का खर्च भी एमेजोन उठाएगा
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक्सपायर और खराब सामान के वैज्ञानिक निस्तारण की लागत एमेजोन को वहन करनी होगी। यानी सामान FDA की निगरानी में नष्ट किया जाएगा, लेकिन इस प्रक्रिया का आर्थिक भार कंपनी पर रहेगा। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
FDA को 27 अगस्त तक देना होगा जवाब
हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र FDA को एमेजोन की याचिका पर 27 अगस्त तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। एमेजोन ने अपने भिवंडी गोदाम के लाइसेंस के खिलाफ अदालत का रुख किया है। इसलिए फिलहाल एक्सपायर्ड सामान के निस्तारण के लिए अदालत ने अंतरिम व्यवस्था तय की है, जबकि लाइसेंस से जुड़े विवाद पर आगे सुनवाई जारी रहेगी।
24 जून को FDA ने किया था निरीक्षण
मामले से संबंधित याचिका के अनुसार, FDA अधिकारियों ने 24 जून को एमेजोन के भिवंडी गोदाम का निरीक्षण किया था। इसके बाद अगले ही दिन गोदाम का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। एमेजोन की ओर से अदालत में यह दावा किया गया कि कार्रवाई से पहले उसे सुधार के लिए नोटिस नहीं दिया गया था। बाद में संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपील की गई, लेकिन प्रक्रिया के दौरान FDA की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और फिर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की गई।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा सबसे अहम
एक्सपायर खाद्य सामग्री का बाजार में पहुंचना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसी वजह से खाद्य नियामक ऐसी सामग्री की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई करते हैं। इस मामले में भी अदालत के निर्देश का एक अहम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भिवंडी गोदाम में मौजूद एक्सपायर या खराब सामान सुरक्षित तरीके से नष्ट हो और उसकी दोबारा बिक्री की कोई संभावना न रहे।
कोर्ट के आदेश से क्या साफ हुआ?
बॉम्बे हाई कोर्ट के ताजा निर्देश से फिलहाल तीन बातें स्पष्ट हैं:
एमेजोन को सभी एक्सपायर और खराब सामान की इन्वेंट्री तैयार करनी होगी।
सामान को संबंधित FDA अधिकारी को सौंपना होगा।
वैज्ञानिक निस्तारण की पूरी लागत एमेजोन को उठानी होगी।
लाइसेंस विवाद पर अभी फैसला बाकी
यह समझना जरूरी है कि अदालत का ताजा आदेश एक्सपायर सामान के निस्तारण से संबंधित है। एमेजोन के भिवंडी गोदाम के लाइसेंस को लेकर FDA और कंपनी के बीच विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। FDA को 27 अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करना है। इसके बाद अदालत इस मामले में आगे की दलीलों और दस्तावेजों पर विचार करेगी।
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