मुंबई। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता वारिस पठान ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कहा है कि वह इसका सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति को इसे गाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि वह केवल अल्लाह की इबादत करते हैं और भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आचरण करने का अधिकार देता है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुंबई में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए वारिस पठान ने कहा कि शहर के विभिन्न स्थानों पर पूरे उत्साह के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इन कार्यक्रमों में मदरसों के बच्चे, पुलिस अधिकारी और आम नागरिक भी शामिल हुए। सभी ने राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया और तिरंगे को सलामी दी।
पठान ने कहा कि तिरंगा देश के सम्मान, गौरव और शान का प्रतीक है। वह और उनकी पार्टी हमेशा राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रगान का सम्मान करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति सम्मान को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए।
वंदे मातरम् की कुछ पंक्तियों पर जताई आपत्ति
वारिस पठान ने कहा कि मुसलमान ‘वंदे मातरम्’ का आदर करते हैं, लेकिन गीत की कुछ पंक्तियों को उनके धार्मिक विश्वास के अनुरूप नहीं माना जाता। इसी वजह से कुछ मुस्लिम नागरिक इसका पाठ करने में असहज महसूस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति को गीत गाने के लिए बाध्य करना उचित नहीं होगा।
उनके मुताबिक, संविधान का अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने तथा उसका प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है। पठान ने कहा कि देश का सम्मान करना और किसी गीत को अनिवार्य रूप से गाना दो अलग-अलग विषय हैं।
इससे पहले भी उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के गायन को अनिवार्य बनाने से संबंधित प्रस्तावों का विरोध किया था। मार्च 2026 में एक संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की एडवाइजरी को तत्काल कानूनी बाध्यता के रूप में नहीं माना था और आशंका पर आधारित याचिका को समय से पहले बताया था। 
 महिलाओं के सम्मान पर भाजपा को घेरा
महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर वारिस पठान ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान की बात करने वाले राजनीतिक दलों को अपने कार्यों में भी इसे प्रदर्शित करना चाहिए। उन्होंने बिल्किस बानो मामले का उल्लेख करते हुए दोषियों की रिहाई के बाद उनके स्वागत को लेकर सवाल उठाए।
गौरतलब है कि बिल्किस बानो मामले में गुजरात सरकार द्वारा 11 दोषियों को दी गई समयपूर्व रिहाई को सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2024 में रद्द कर दिया था। अदालत ने दोषियों को दोबारा जेल प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। पठान ने इसी मामले का हवाला देते हुए भाजपा के महिला सम्मान से जुड़े दावों पर प्रश्न उठाए।
 शिक्षा और रोजगार चाहता है आज का युवा
एआईएमआईएम नेता ने कहा कि भारत ने आजादी के 80 वर्ष पूरे कर लिए हैं और वर्तमान समय का युवा शिक्षा, रोजगार तथा देश की प्रगति चाहता है। राजनीतिक दलों को धार्मिक मुद्दों पर लोगों के बीच नफरत पैदा करने के बजाय युवाओं के भविष्य, रोजगार और विकास से जुड़े विषयों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत का मुस्लिम समुदाय आज भी सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का सामना कर रहा है। पठान के मुताबिक, विभिन्न राजनीतिक दलों ने मुसलमानों का वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया, लेकिन उन्हें उनकी आबादी और अधिकारों के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
उन्होंने कांग्रेस और भाजपा दोनों से सवाल किया कि इन पार्टियों ने चुनावों में कितने मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया और उन्हें नेतृत्व के कितने अवसर उपलब्ध कराए। पठान ने कहा कि केवल चुनाव के समय किसी समुदाय को याद करना पर्याप्त नहीं है।
 शांति और भाईचारे की अपील
वारिस पठान ने देशवासियों से शांति, सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के लोग जब मिलकर भारत की प्रगति में योगदान देते हैं, तभी देश की वास्तविक खूबसूरती दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन मतभेदों को नफरत या हिंसा का कारण नहीं बनने देना चाहिए। हर नागरिक को तिरंगे, संविधान और देश की एकता का सम्मान करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।
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