चंडीगढ़। पंजाब के मानसा जिले में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटना की पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने हत्या के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की बात कही।मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को पत्रकारों से बातचीत में हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मानसा में हुई घटना बेहद निंदनीय है। उन्होंने बताया कि मृतक कार्यकर्ता और आरोपी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। चीमा ने दावा किया कि मामले के दोषी को पकड़ लिया गया है। हालांकि मंगलवार दोपहर तक प्रकाशित पुलिस से जुड़ी रिपोर्टों में मुख्य आरोपी की तलाश जारी होने की जानकारी दी गई थी।
हरपाल सिंह चीमा ने घटना की निंदा की
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या जैसी घटना को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।उन्होंने कहा कि आपसी विवाद या किसी अन्य कारण से किसी व्यक्ति को हिंसा करने का अधिकार नहीं मिल जाता। कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।चीमा ने कहा कि मानसा की घटना में शामिल लोगों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून अपने हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
मेडिकल स्टोर में विवाद के बाद चली गोली
जानकारी के अनुसार, मानसा में नशे के खिलाफ सक्रिय परमिंदर सिंह झोटा मंगलवार सुबह एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे।झोटा ने मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार पर कथित तौर पर नशीली दवाओं की अवैध बिक्री करने का आरोप लगाया। इस दौरान दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद मेडिकल स्टोर संचालक ने पिस्तौल निकालकर झोटा पर गोली चला दी। घटना के दौरान झोटा अपने मोबाइल फोन से फेसबुक पर लाइव वीडियो बना रहे थे।गोलीबारी में झोटा के साथ मौजूद कुछ अन्य लोग भी घायल हुए। इस घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
गोली लगने के बाद परमिंदर सिंह झोटा को मानसा के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुरमेल सिंह के अनुसार, झोटा को तीन गोलियां लगी थीं। इनमें दो पेट और एक जांघ में लगी थी। एक गोली उनके लीवर को नुकसान पहुंचाते हुए शरीर के आर-पार हो गई थी।इस घटना में घायल अन्य लोगों को भी उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। झोटा की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।
लंबे समय से नशे के खिलाफ चला रहे थे अभियान
परमिंदर सिंह झोटा मानसा और आसपास के क्षेत्रों में नशे के खिलाफ अभियान चलाने के लिए पहचाने जाते थे।वह मेडिकल स्टोरों पर नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के मामलों को उठाते थे। इसके साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते थे।झोटा ने कई बार वीडियो बनाकर संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। वह युवाओं को नशे से बचाने और अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सक्रिय थे।उनकी गतिविधियों के कारण कुछ दवा विक्रेताओं से पहले भी विवाद होने की जानकारी सामने आई है।
पुराने विवाद को लेकर सामने आई जानकारी
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि परमिंदर सिंह झोटा और आरोपी के बीच पुराना विवाद था।रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2023 में झोटा ने संबंधित मेडिकल स्टोर संचालक पर कथित नशीली दवाएं बेचने का आरोप लगाया था। उस समय भी दोनों के बीच सार्वजनिक विवाद हुआ था।हालांकि हत्या के पीछे पुरानी रंजिश ही एकमात्र कारण थी या अन्य परिस्थितियां भी जिम्मेदार थीं, यह जांच का विषय है।
हत्या के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरा
परमिंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाए हैं।विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से घटना की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।मानसा पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। घटना से जुड़े साक्ष्यों और वीडियो की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।