महाराष्ट्र सरकार के सामने 'तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड' के पुनर्गठन के लिए एक नई समय-सीमा आ गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने सरकार को इस बोर्ड को बहाल करने का निर्देश दिया है, जो चार साल से अधिक समय पहले भंग किए जाने के बाद से निष्क्रिय पड़ा है। कोर्ट ने राज्य सरकार की 29 जून, 2022 की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसके तहत बोर्ड को भंग करके उसकी जगह एक प्रशासक नियुक्त किया गया था। कोर्ट ने 28 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) मांगी है और चेतावनी दी है कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया, तो राज्य के प्रधान सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।
बोर्ड के पूर्व सचिव और सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक, रविंदर सिंह बुंगाई ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पहले दिए गए निर्देशों का पालन न करने के बाद कोर्ट ने यह नई समय-सीमा तय की है। बुंगाई के अनुसार, हाई कोर्ट ने 6 अक्टूबर, 2025 को सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो महीने के भीतर बोर्ड को उसकी पुरानी स्थिति (भंग होने से पहले की स्थिति) में बहाल करे। चूंकि इस आदेश का पालन नहीं हुआ, इसलिए याचिकाकर्ताओं ने अवमानना ​​याचिका (contempt petition) दायर की।
अवमानना ​​कार्यवाही के दौरान, सरकारी वकील ने स्वीकार किया कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया था। बुंगाई ने बताया कि इसके बाद कोर्ट ने बोर्ड को बहाल करने के लिए 28 अक्टूबर की समय-सीमा तय कर दी। सूत्रों के मुताबिक, तख्त के प्रबंधकों ने उन सदस्यों की एक सूची सौंपी है जिन्हें पुरानी व्यवस्था के तहत फिर से बहाल किया जाना है। फिलहाल, डॉ. विजय सतबीर सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी) बोर्ड के प्रमुख हैं और इसके दैनिक कामकाज का प्रबंधन कर रहे हैं। नांदेड़ में मुख्यालय वाला 'तख्त श्री हजूर साहिब गुरुद्वारा बोर्ड', सिख धर्म के पांच तख्तों में से एक का प्रबंधन करता है।
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