Balotra: 15 हजार कमाने वाले कारीगर पर करोड़ों का टैक्स नोटिस

15 हजार की आय, करोड़ों का टैक्स नोटिस बना चर्चा का विषय

Update: 2026-07-30 10:58 GMT

बालाेतरा:  महीनेभर मेहनत करके मुश्किल से 10 से 15 हजार रुपये कमाने वाले एक साधारण जूती कारीगर के होश उस समय उड़ गए, जब उसके नाम पर 6 करोड़ 78 लाख 97 हजार 357 रुपये का जीएसटी बकाया निकल आया। तमिलनाडु से जारी इस नोटिस के बाद बैंक ने उसका खाता फ्रीज कर दिया। अब गरीब कारीगर न्याय की गुहार लगा रहा है और पूरे मामले में साइबर ठगी की आशंका जताई जा रही है।

बालोतरा जिले के गुड़ामालानी के जीनगर मोहल्ला निवासी जितेंद्र कुमार जीनगर चमड़े की पारंपरिक जूतियां बनाकर परिवार का गुजारा करते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि हाल ही में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले मकान की पहली किस्त से एक कमरा बनवा रहे हैं। परिवार फिलहाल छोटे भाई के घर रह रहा है। ऐसे में करोड़ों रुपये के टैक्स नोटिस ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है।

जितेंद्र ने बताया कि 25 जुलाई को बैंक खाता बंद होने की जानकारी मिलने पर वह भारतीय स्टेट बैंक की गुड़ामालानी शाखा पहुंचे थे।

बैंक अधिकारियों ने 28 जुलाई को आने को कहा। दोबारा पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि उनके नाम जीएसटी का भारी बकाया है और इसी कारण बैंक खाते पर रोक लगाई गई है। बैंक ने उन्हें तमिलनाडु से जारी नोटिस भी सौंप दिया। इसके बाद उन्होंने गुड़ामालानी थाने में शिकायत दी, जहां से उन्हें साइबर थाना जाने की सलाह दी गई।

जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के वाणिज्यिक कर विभाग के कृष्णगिरी-2 असेसमेंट सर्किल की ओर से 5 मई 2026 को जारी नोटिस में श्री शिवम एक्सपोर्ट्स नामक फर्म पर वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक का करीब 6.79 करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया बताया गया है।

इसी आधार पर पैन नंबर से जुड़े बैंक खातों, एफडी और अन्य खातों को तत्काल फ्रीज करने के निर्देश जारी किए गए।

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि किसी साइबर ठग गिरोह ने जितेंद्र के पैन कार्ड और पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर तमिलनाडु के पते पर फर्जी कंपनी का पंजीकरण करा लिया। जितेंद्र का कहना है कि उन्होंने कभी कोई कंपनी नहीं बनाई और न ही तमिलनाडु से उनका कोई संबंध है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में पिता के निधन के बाद आर्थिक जरूरत के चलते उन्होंने बाड़मेर की एक फाइनेंस कंपनी से ऋण लेने के लिए दस्तावेज दिए थे।

उस समय सिबिल जांच के नाम पर मोबाइल पर आए ओटीपी भी साझा कराए गए थे। उन्हें आशंका है कि उसी दौरान उनके दस्तावेज का गलत इस्तेमाल किया गया।

जितेंद्र बताते हैं कि उनके परिवार में पत्नी, बेटा, बेटी और मां हैं। दिन-रात मेहनत के बावजूद महीने में 10 से 15 हजार रुपये की ही आमदनी हो पाती है। ऐसे में करोड़ों रुपये के टैक्स नोटिस ने उनके सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। उधर, वाणिज्यिक कर विभाग के सहायक कर अधिकारी बिहारीलाल ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला पैन कार्ड के दुरुपयोग कर फर्जी कंपनी बनाने का प्रतीत होता है। उन्होंने पीड़ित को तत्काल साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराने की सलाह देते हुए कहा कि नोटिस उपलब्ध कराने पर विभाग यह पता लगाने में सहयोग करेगा कि कंपनी के पंजीकरण के समय कौन-से मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और दस्तावेज इस्तेमाल किए गए थे।

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