उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित केदारताल ट्रेक पर खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण 12 लोगों के फंसने की खबर सामने आई है। इनमें सात पर्यटक और पांच सपोर्टिंग स्टाफ के सदस्य शामिल हैं। ऊंचाई वाले इस दुर्गम क्षेत्र में लगातार बदलते मौसम और रास्ते में हिमस्खलन होने के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया है। अब तक चार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि शेष आठ लोगों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं ने बताया कि फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, केदारताल ट्रेक पर गए पर्यटक और उनके साथ मौजूद सपोर्टिंग स्टाफ अचानक मौसम बिगड़ने के कारण रास्ते में फंस गए। क्षेत्र में भारी बर्फबारी होने से ट्रेकिंग मार्ग पर आवाजाही मुश्किल हो गई। इसके अलावा रास्ते में हिमस्खलन होने से कई स्थानों पर बर्फ जमा हो गई है, जिससे बचाव दलों को आगे बढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऊंचाई वाले इलाके में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां रेस्क्यू अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं के अनुसार, केदारताल क्षेत्र में कुल 12 लोग फंसे थे। इनमें सात पर्यटक और पांच सपोर्टिंग स्टाफ के सदस्य शामिल थे। सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने बचाव अभियान शुरू किया। अब तक चार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। शेष आठ लोगों में सात पर्यटक और एक गाइड शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

केदारताल उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध उच्च हिमालयी झील है। समुद्र तल से लगभग 4,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झील अपने प्राकृतिक सौंदर्य और कठिन ट्रेकिंग मार्ग के लिए जानी जाती है। यहां पहुंचने के लिए पर्वतीय रास्तों, खड़ी चढ़ाई और दुर्गम इलाकों से होकर गुजरना पड़ता है। यही कारण है कि केदारताल ट्रेक को अनुभवी ट्रेकर्स के लिए भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

इस क्षेत्र में मौसम अचानक बदल सकता है। खासकर अक्टूबर और नवंबर के दौरान ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान तेजी से गिरने लगता है और बर्फबारी की संभावना बढ़ जाती है। भारी हिमपात के बाद ट्रेकिंग मार्ग बर्फ से ढक सकते हैं, जिससे रास्ते की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना बचाव दलों के लिए कठिन कार्य बन जाता है।

प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती शेष आठ लोगों तक सुरक्षित पहुंचने की है। हिमस्खलन के कारण मार्ग प्रभावित होने से बचाव कार्य में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ की मोटी परत और ढलान वाले रास्ते बचावकर्मियों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से रेस्क्यू अभियान जारी रखा गया है।

जानकारी के अनुसार, यह दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था। इसकी वापसी 29 अक्टूबर को निर्धारित थी, लेकिन भारी बर्फबारी और रास्ता अवरुद्ध होने के कारण दल वापस नहीं लौट सका। 30 अक्टूबर को ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से संपर्क होने पर फंसे लोगों ने मदद मांगी। इसके बाद प्रशासन ने बचाव अभियान शुरू किया।

31 अक्टूबर को एनडीआरएफ के दस जवानों की टीम उत्तरकाशी से गंगोत्री के लिए रवाना हुई। इसके अलावा एसडीआरएफ के छह जवान, वन विभाग के दो कर्मचारी और ट्रेकिंग एजेंसी के सात सदस्य भी अभियान में शामिल किए गए। इससे पहले ट्रेकिंग एजेंसी की टीम ने करीब छह किलोमीटर तक रास्ता खोलने का प्रयास किया था।

बचाव दल को कच्ची ढांग के आसपास तीन पोर्टर और एक कुक सुरक्षित मिले। वहीं, भोजखड़क से आगे सात पर्यटक और एक गाइड हिमस्खलन के कारण फंसे हुए हैं। फंसे पर्यटकों में पांच पश्चिम बंगाल और दो उत्तर प्रदेश के बताए गए हैं। एक ट्रेकर के सिर में चोट लगने की भी सूचना है। प्रशासन ने घायल को उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि बचाव कार्य में हेलीकॉप्टर की सहायता लेने के प्रयास किए जा रहे हैं। मौसम अनुकूल रहने पर हवाई मार्ग से फंसे लोगों को निकालने की योजना है। प्रशासन को हेलीकॉप्टर से की गई खोजबीन में आठों लोगों के सुरक्षित स्थान पर होने की जानकारी मिली है। हालांकि, उनकी सुरक्षित वापसी की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के बाद हिमस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। बर्फ से ढके रास्तों पर आवाजाही के दौरान फिसलने, रास्ता भटकने और अत्यधिक ठंड के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका रहती है। ऐसे में बचाव दलों को मौसम की स्थिति और पहाड़ी ढलानों की सुरक्षा का आकलन करते हुए आगे बढ़ना पड़ता है।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता भोजखड़क क्षेत्र में फंसे सभी आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। बचाव अभियान में शामिल विभिन्न विभागों की टीमें आपसी समन्वय से काम कर रही हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि राहत एवं बचाव कार्य में आवश्यक सावधानी बरतते हुए जल्द से जल्द सभी लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।

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