वाराणसी। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान अर्णब का सीधा प्रचंड असर भले ही वाराणसी में नहीं पड़ा, लेकिन इसके प्रभाव से हुई लगातार बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। काशी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में करीब 36 घंटे तक हुई बारिश और तेज हवाओं ने धान की तैयार फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई गांवों में धान की खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई, जबकि कटाई के बाद खेतों और खलिहानों में रखे धान के ढेर भीग गए। किसानों के अनुसार, सैकड़ों हेक्टेयर में फसल प्रभावित हुई है। कुछ स्थानों पर खेतों में पानी भर जाने के बावजूद किसान पकी हुई फसल को काटकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं। लगातार बारिश से धान के दानों में नमी बढ़ने, फसल सड़ने और उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। किसानों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
36 घंटे की बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर फेरा पानी
वाराणसी में गुरुवार से शुरू हुई बारिश शुक्रवार तक जारी रही। लगातार बरसात के कारण ग्रामीण इलाकों के खेतों में पानी जमा हो गया।इस समय धान की फसल कई स्थानों पर पूरी तरह पक चुकी है और किसान कटाई में जुटे हुए हैं।ऐसे में बेमौसम बारिश से तैयार फसल को नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी धान की बालियां तेज हवा और पानी के कारण जमीन पर गिर गई हैं।बारिश से केवल खड़ी फसल ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि जिन किसानों ने धान काटकर खेतों में रखा था, उनकी उपज भी भीग गई।किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत के बाद जब फसल घर लाने का समय आया, तब मौसम ने उनकी परेशानियां बढ़ा दीं।
इन गांवों में धान की फसल को नुकसान
वाराणसी के चौबेपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में धान की फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।चौबेपुर, चंद्रावती, मोलनापुर, ढाखा और रजवाड़ी सहित कई गांवों में तेज हवा के कारण धान की फसल गिरने की जानकारी मिली है।किसानों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण खेतों की मिट्टी गीली हो गई है। इससे कटाई और फसल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।कुछ किसानों ने बताया कि खेतों में पानी भरा होने के बावजूद उन्हें फसल काटनी पड़ रही है, ताकि नुकसान को और बढ़ने से रोका जा सके।हालांकि, जिले में कुल कितने हेक्टेयर फसल को कितना नुकसान हुआ है, इसकी अंतिम आधिकारिक पुष्टि कृषि विभाग के आकलन के बाद ही होगी।
कटाई के बाद रखा धान भीगने से बढ़ी परेशानी
किसानों की सबसे बड़ी चिंता कटाई के बाद खुले में रखा धान है।कई किसानों ने धान की कटाई पूरी करके उसे खेतों और खलिहानों में इकट्ठा किया था। लेकिन लगातार बारिश के कारण धान के ढेर भीग गए।विशेषज्ञों के अनुसार, कटाई के बाद धान में अधिक नमी रहने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।यदि भीगी उपज को पर्याप्त रूप से सुखाया नहीं जाए, तो उसमें फफूंद लगने और दानों के खराब होने का जोखिम बढ़ सकता है।
इससे किसानों को उपज बेचने में भी परेशानी हो सकती है।
धान में नमी की मात्रा अधिक होने पर खरीद केंद्रों पर गुणवत्ता संबंधी मानकों को पूरा करने में कठिनाई आ सकती है।यही वजह है कि किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि भीगी उपज को सुरक्षित तरीके से सुखाया जा सके।
तेज हवाओं से जमीन पर बिछ गई फसल
बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने भी किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।कई स्थानों पर धान की पूरी तरह तैयार फसल खेतों में गिर गई।फसल गिरने से मशीनों के माध्यम से कटाई करना कठिन हो सकता है। ऐसे में किसानों को हाथ से कटाई करनी पड़ सकती है।इससे खेती की लागत और श्रम की जरूरत बढ़ सकती है।खेतों में पानी जमा रहने से गिरे हुए धान की बालियां लंबे समय तक नमी के संपर्क में रह सकती हैं।इससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है।किसानों का कहना है कि यदि जल्द मौसम साफ नहीं हुआ, तो नुकसान और बढ़ सकता है।
कृषि विभाग ने पहले ही जारी किया था अलर्ट
चक्रवात अर्णब के प्रभाव की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने 27 अक्टूबर को किसानों के लिए सावधानी संबंधी सलाह जारी की थी।जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह ने किसानों को कटाई के बाद खुले में रखे धान को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी थी।कृषि विभाग ने तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए किसानों से फसल की सुरक्षा के उपाय अपनाने को कहा था।वाराणसी जिले में 40 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में धान की खेती होने की जानकारी भी सामने आई थी।ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।
तापमान में भी आई बड़ी गिरावट
लगातार बारिश के कारण वाराणसी और आसपास के इलाकों में मौसम काफी ठंडा हो गया है।मौसम संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को अधिकतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 7.2 डिग्री कम था।वहीं, न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।इस दौरान 24 घंटे में 29.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
वातावरण में नमी का स्तर भी काफी अधिक रहा।
बारिश और बादलों के कारण दिनभर धूप नहीं निकलने से खेतों में जमा पानी सूखने की प्रक्रिया धीमी हो गई है।इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।सब्जियों की खेती को भी नुकसान की आशंकाबेमौसम बारिश का असर केवल धान की फसल तक सीमित नहीं है।वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को भी नुकसान की आशंका है।इस समय कई किसान सर्दियों की सब्जियों की खेती की तैयारी कर रहे हैं।कुछ खेतों में सब्जियों की पौध तैयार हो चुकी है, जबकि कई स्थानों पर बुवाई का काम चल रहा है।लगातार बारिश और खेतों में जलभराव से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
इससे उत्पादन प्रभावित होने की संभावना रहती है।
हालांकि, सब्जियों की फसल में वास्तविक नुकसान का आकलन भी खेतों की स्थिति और कृषि विभाग के सर्वे के आधार पर ही किया जा सकेगा।चंदौली और आजमगढ़ में भी बिगड़े हालातचक्रवात अर्णब के प्रभाव से वाराणसी के अलावा पूर्वांचल के अन्य जिलों में भी बारिश हुई है।चंदौली में धान की तैयार फसल को नुकसान पहुंचने की खबरों के बाद जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया।जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के नेतृत्व में अधिकारियों ने खेतों में पहुंचकर नुकसान की स्थिति देखी।वहीं, आजमगढ़ के मेंहनगर क्षेत्र में लगातार बारिश और तेज हवा से पिछैती धान की फसल गिरने की जानकारी सामने आई है।किसानों को आशंका है कि बारिश जारी रहने पर धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और रबी फसलों की बुवाई में भी देरी होगी।
किसानों ने की मुआवजे की मांग
फसलों को हुए नुकसान के बाद किसानों ने प्रशासन से राहत उपलब्ध कराने की मांग शुरू कर दी है।किसानों का कहना है कि खेती में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर पहले ही बड़ी रकम खर्च हो चुकी है।फसल तैयार होने के बाद बारिश से नुकसान होने पर उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।किसानों ने मांग की है कि कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम प्रभावित गांवों में जाकर नुकसान का सर्वे करे।इसके आधार पर पात्र किसानों को सरकारी सहायता और फसल बीमा का लाभ दिया जाए।हालांकि, मुआवजे की राशि और लाभार्थियों की संख्या नुकसान के आधिकारिक आकलन तथा संबंधित योजनाओं के नियमों पर निर्भर करेगी।
फसल बीमा कराने वाले किसान रखें ध्यान
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुई है, वे संबंधित बीमा योजना के नियमों के अनुसार समय पर नुकसान की सूचना दें।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कुछ प्रकार की स्थानीय आपदाओं और कटाई के बाद हुए नुकसान के लिए निर्धारित शर्तों पर बीमा सहायता उपलब्ध हो सकती है।ऐसे मामलों में पात्र किसानों को सामान्यतः 72 घंटे के भीतर नुकसान की सूचना देना जरूरी होता है।किसान संबंधित बीमा कंपनी, बैंक, कृषि कार्यालय या आधिकारिक फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रत्येक प्रकार का नुकसान अपने आप बीमा भुगतान के लिए पात्र नहीं होता।
किसानों को अब मौसम साफ होने का इंतजार
वाराणसी में लगातार बारिश ने कृषि कार्यों को प्रभावित कर दिया है।जिन किसानों की धान की फसल खेतों में गिर गई है, वे अब उसे सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहे हैं।वहीं, जिन किसानों का धान भीग चुका है, उन्हें उपज सुखाने के लिए मौसम साफ होने का इंतजार हैयदि आगामी दिनों में धूप निकलती है और खेतों में जमा पानी कम होता है, तो किसानों को कटाई तथा उपज सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।फिलहाल किसानों की सबसे बड़ी मांग फसल नुकसान का शीघ्र सर्वे और सरकारी राहत है।अब कृषि विभाग के आकलन से ही यह स्पष्ट होगा कि काशी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बेमौसम बारिश से कितनी फसल प्रभावित हुई है।