लखनऊ। मौसम में अचानक आए बदलाव और बेमौसम बारिश के बाद डेंगू के मामलों में तेजी देखने को मिल रही है। पिछले 72 घंटों के दौरान शहर में डेंगू के 75 नए मरीज सामने आने की जानकारी मिली है। इनमें बुधवार को 24, गुरुवार को 26 और शुक्रवार को 25 मरीज शामिल हैं। तीन दिनों में इतनी बड़ी संख्या में मामले सामने आने से मच्छरजनित बीमारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। बारिश के बाद विभिन्न स्थानों पर जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी हो गया है। डेंगू से बचाव के लिए घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से सुरक्षा और बुखार होने पर समय से जांच कराना आवश्यक है। हालांकि, इन 75 मामलों से संबंधित शहर और स्वास्थ्य विभाग की मूल रिपोर्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इन्हें उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के आधार पर बताया जा रहा है।
तीन दिन में सामने आए डेंगू के 75 मामले
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बुधवार से शुक्रवार तक लगातार डेंगू के नए मरीज सामने आए हैं।बुधवार, 28 अक्टूबर को 24 मरीज मिलने की जानकारी सामने आई थी। इसके अगले दिन गुरुवार को 26 नए मरीज दर्ज किए गए।शुक्रवार, 30 अक्टूबर को 25 और मरीज मिलने की बात कही गई है।इस तरह तीन दिनों में कुल 75 नए मामले सामने आने की जानकारी है।लगातार मामले मिलने से संक्रमण की रोकथाम और मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान का महत्व बढ़ गया है।हालांकि, इनमें कितने मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और कितनों का घर पर इलाज चल रहा है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।इसी तरह शहर में इस वर्ष अब तक मिले कुल मरीजों और डेंगू से मौतों के बारे में भी प्रमाणित आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
बेमौसम बारिश से क्यों बढ़ता है डेंगू का खतरा?
बारिश के बाद घरों की छतों, खाली बर्तनों, पुराने टायरों, कूलरों और अन्य स्थानों पर पानी जमा हो सकता है।ऐसी जगहों पर डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर अंडे दे सकते हैं।एडीज मच्छर सामान्यतः साफ या अपेक्षाकृत साफ ठहरे हुए पानी में भी प्रजनन कर सकते हैं।इसलिए केवल गंदे नालों की सफाई पर्याप्त नहीं है। घरों के भीतर और आसपास मौजूद छोटे जलस्रोतों की नियमित जांच भी जरूरी है।गर्म और नम परिस्थितियां मच्छरों के विकास के लिए अनुकूल हो सकती हैं।हालांकि, केवल ठंड बढ़ने से डेंगू का संक्रमण बढ़ता है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। संक्रमण का जोखिम तापमान, बारिश, पानी के जमाव और मच्छरों की संख्या सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।
डेंगू के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है।इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं।डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में तकलीफ तथा कमजोरी महसूस हो सकती है।कुछ मरीजों में त्वचा पर लाल चकत्ते और मतली या उल्टी की शिकायत भी हो सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, हर डेंगू मरीज में एक जैसे लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है।कई संक्रमित व्यक्तियों में हल्के लक्षण होते हैं, जबकि कुछ में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।बुखार और संबंधित लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
बुखार उतरने के बाद भी जरूरी है सावधानी
डेंगू के मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार उतरने के बाद भी कुछ मरीजों की स्थिति गंभीर हो सकती है।लगातार पेट दर्द, बार-बार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक सुस्ती, बेचैनी या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण खतरे के संकेत हो सकते हैं।ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।डेंगू के गंभीर मामलों में शरीर में तरल पदार्थ के संतुलन और रक्तसंचार पर असर पड़ सकता है।इसलिए मरीज को केवल बुखार कम होने के आधार पर पूरी तरह स्वस्थ नहीं मानना चाहिए।डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और निगरानी जरूरी है।
प्लेटलेट्स कम होने पर क्या करें?
डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है।लेकिन केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।चिकित्सक मरीज की पूरी स्थिति, रक्तचाप, रक्तस्राव, शरीर में पानी की मात्रा और अन्य जांच रिपोर्टों का मूल्यांकन करते हैं।किसी भी मरीज को स्वयं से प्लेटलेट्स बढ़ाने वाली दवाएं या घरेलू उपचार नहीं अपनाने चाहिए।डेंगू में पर्याप्त तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, तरल पदार्थों की मात्रा मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार तय होनी चाहिए।बुखार और दर्द के लिए डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जा सकता है।डेंगू की आशंका होने पर एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
घर में जमा पानी बन सकता है परेशानी
डेंगू से बचाव के लिए सबसे प्रभावी उपायों में मच्छरों के प्रजनन को रोकना शामिल है।इसके लिए घरों में रखे कूलर, फूलदान, पानी की टंकियों, बाल्टियों और अन्य बर्तनों की नियमित सफाई जरूरी है।पानी जमा करने वाले बर्तनों को ढककर रखना चाहिए।पुराने टायर, नारियल के खोल और टूटे बर्तन खुले में नहीं छोड़ने चाहिए, क्योंकि इनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है।छतों और बालकनी में भी जलभराव की जांच करनी चाहिए।एडीज मच्छर दिन के समय भी काट सकते हैं। इसलिए केवल रात में मच्छरदानी लगाने को पर्याप्त सुरक्षा नहीं माना जा सकता।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर दें ध्यान
डेंगू का संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों में बीमारी की स्थिति का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।घर में किसी को बुखार आने पर उसके लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।विशेष रूप से बच्चों में सुस्ती, लगातार उल्टी, कम पेशाब या पानी की कमी के संकेत मिलने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।बुजुर्गों में अन्य बीमारियों की मौजूदगी उपचार संबंधी निर्णयों को प्रभावित कर सकती है।डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि डेंगू एक वायरल बीमारी है।
मच्छरों से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
मच्छरों से सुरक्षा के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना उपयोगी हो सकता है।घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएं तथा जरूरत के अनुसार मच्छरदानी का उपयोग करें।निर्देशों के अनुसार उपयुक्त मच्छररोधी रिपेलेंट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।घर और कार्यस्थल के आसपास पानी जमा न होने दें।सप्ताह में कम से कम एक बार पानी रखने वाले बर्तनों की जांच और सफाई करें।अगर किसी स्थान पर लगातार जलभराव हो रहा है, तो संबंधित नगर निकाय या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें।इन सावधानियों से मच्छरों के प्रजनन और संक्रमण का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जरूरी
तीन दिनों में 75 नए मामले सामने आने की जानकारी के बाद प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी का महत्व बढ़ गया है।डेंगू नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकाय मिलकर मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान तथा आवश्यक नियंत्रण उपाय अपना सकते हैं।जिन इलाकों में अधिक मरीज मिल रहे हों, वहां लार्वा सर्वेक्षण और जलभराव हटाने की कार्रवाई उपयोगी हो सकती है।इसके अलावा लोगों को बीमारी के लक्षण और समय पर जांच कराने के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।हालांकि, संबंधित शहर में विशेष फॉगिंग अभियान, अतिरिक्त स्वास्थ्य टीमों की तैनाती या किसी नए प्रशासनिक आदेश की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।इसलिए ऐसे किसी अभियान के शुरू होने का दावा करना फिलहाल उचित नहीं होगा।
डेंगू से बचाव में लोगों की भागीदारी जरूरी
डेंगू का खतरा केवल अस्पतालों या स्वास्थ्य विभाग तक सीमित मुद्दा नहीं है।इसके नियंत्रण में आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।घर में जमा पानी की सफाई, मच्छरों से बचाव और बुखार होने पर उचित जांच जैसे कदम संक्रमण का जोखिम कम कर सकते हैं।बारिश के बाद विशेष रूप से उन स्थानों पर ध्यान देना चाहिए, जहां पानी लंबे समय तक जमा रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी की शुरुआती पहचान और गंभीर लक्षण दिखाई देने पर समय से उपचार मिलने से जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।फिलहाल तीन दिनों में 75 नए मरीज मिलने की जानकारी ने डेंगू से बचाव की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। ऐसे में सावधानी, स्वच्छता और समय पर चिकित्सा सहायता ही सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।
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