अयोध्या राम मंदिर को जल्द मिलेगा पहला CEO, चयन प्रक्रिया अंतिम चरण की ओर
अयोध्या : स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ट्रस्ट अब मंदिर के संचालन और प्रबंधन को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के लिए नई प्रशासनिक संरचना तैयार कर रहा है। इसी क्रम में पहली बार मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। ट्रस्ट के अनुसार इस पद के लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच और चयन प्रक्रिया जारी है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि सीईओ पद के लिए अब तक लगभग 5,200 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इन सभी आवेदनों की स्क्रीनिंग और प्रारंभिक चयन की जिम्मेदारी सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में गठित समिति को सौंपी गई है। समिति प्रत्येक आवेदन का सावधानीपूर्वक परीक्षण कर योग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार कर रही है। बड़ी संख्या में आवेदन आने के कारण इस प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है।
ट्रस्ट का मानना है कि राम मंदिर में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पेशेवर तथा प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से पहली बार सीईओ पद का सृजन किया गया है, ताकि मंदिर के दैनिक संचालन, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा, श्रद्धालु सुविधाओं और विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी एक व्यवस्थित प्रशासनिक ढांचे के तहत की जा सके।
सीईओ की नियुक्ति में समय लगने की संभावना को देखते हुए ट्रस्ट ने सचिव का नया पद भी सृजित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए और सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित होती रहें।
इस बीच ट्रस्ट ने वित्तीय संचालन को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राम मंदिर निर्माण परियोजना के परियोजना प्रबंधक इंजीनियर जगदीश आफले को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनाए जाने का प्रस्ताव पारित कर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को भेजा गया था। बैंक द्वारा आवश्यक औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित खातों का संचालन दोबारा शुरू कर दिया गया है। ट्रस्ट का कहना है कि इस व्यवस्था से वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता और सुचारु संचालन सुनिश्चित होगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े दर्शन पास की व्यवस्था को लेकर भी ट्रस्ट गंभीर नजर आ रहा है। हाल के दिनों में दर्शन पास प्राप्त करने में श्रद्धालुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इस संबंध में ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव ने बताया कि दो सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और स्थायी समाधान निकाला जाएगा। उनका कहना है कि ट्रस्ट का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
दर्शन पास व्यवस्था में सुधार के तहत तीर्थ यात्री सेवा केंद्र में पास व्यवस्था के प्रभारी सोमेश आनंद से यह जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। उन्हें अब बाग बिजैसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। फिलहाल उनकी जगह किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है। ट्रस्ट के अनुसार वहां पहले से कार्यरत कर्मचारियों और स्वयंसेवकों की टीम सामूहिक रूप से व्यवस्थाओं का संचालन करेगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत बनाना ट्रस्ट की प्राथमिकताओं में शामिल है। हाल के घटनाक्रमों के बाद ट्रस्ट लगातार अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा कर रहा है और आवश्यक सुधार लागू किए जा रहे हैं।
ट्रस्ट का कहना है कि भविष्य में आधुनिक प्रशासनिक प्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता को और मजबूत किया जाएगा, जिससे मंदिर की व्यवस्थाएं बेहतर हों और श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाजनक अनुभव मिल सके। सीईओ की नियुक्ति, सचिव पद का सृजन, वित्तीय संचालन में बदलाव और दर्शन पास व्यवस्था में सुधार जैसे कदम इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माने जा रहे हैं।