अयोध्या चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा चंपतराय समेत तीन सरकारी गवाह
अयोध्या चढ़ावा चोरी केस
अयोध्या: श्रीराम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस की जांच में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और बैंक को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और मंदिर के व्यवस्था प्रमुख रहे गोपाल राव को अभियोजन पक्ष का गवाह बनाया गया है। वहीं जेल में बंद आठ आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया है।
पुलिस के मुताबिक चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद 25 जून को ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की तहरीर और एसआईटी की संस्तुति पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया था। जांच के बाद दाखिल चार्जशीट में कोई नया आरोपी नहीं जोड़ा गया है और पहले से नामजद किसी आरोपी का नाम भी हटाया नहीं गया है।
चार्जशीट में पुलिस ने घटनाक्रम, आरोपियों और गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, दान से जुड़ी सामग्री तथा जांच के दौरान जुटाए गए अन्य साक्ष्यों का विवरण शामिल किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ी 105 घटनाओं का उल्लेख किया है। इसके अलावा आरोपियों के बीच हुए करीब 3300 संदेश भी जांच में सामने आने की बात कही गई है।
पुलिस ने अनुकल्प मिश्र को मामले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। आरोपपत्र के मुताबिक उस पर अन्य लोगों के जरिए चोरी कराने और बाद में रकम का बंटवारा करने का आरोप है। पुलिस की जांच में यह दावा भी किया गया है कि चोरी की रकम का बंटवारा जनौरा के पास हाईवे के निकट एक बाग में किया जाता था। ये आरोप अब न्यायिक प्रक्रिया में परीक्षण के अधीन होंगे। चार्जशीट में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को लेकर भी कई बातें दर्ज की गई हैं। पुलिस के अनुसार उसके पास बिना किसी औपचारिक आदेश के दानपात्रों की चाबियां होने की बात सामने आई है। उस पर श्रद्धालुओं से दर्शन कराने के नाम पर रुपये लेने का भी आरोप है। पुलिस ने उसकी आय और आर्थिक गतिविधियों की भी जांच की है।
जांच का दायरा बैंक खातों तक भी पहुंचा। पुलिस ने ट्रस्ट से जुड़े लोगों, संदिग्धों, गणना कर्मियों और कर्मचारियों सहित 500 से अधिक बैंक खातों की जांच की। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि आरोपियों के खातों से किसी अन्य संदिग्ध खाते में धनराशि का लेनदेन हुआ था या नहीं। जांच के बाद ट्रस्ट पदाधिकारियों और अन्य जांचे गए बैंककर्मियों के खिलाफ अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव को आरोपी के बजाय गवाह बनाए जाने को लेकर अदालत परिसर में विरोध भी देखने को मिला। कुछ अधिवक्ताओं ने इन लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की और आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। अदालत ने संबंधित प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की। इसलिए इस मामले में पुलिस की चार्जशीट का निष्कर्ष और अधिवक्ताओं की आपत्ति अलग-अलग पक्ष हैं।
मामले में चार्जशीट के कुल पन्नों और गवाहों की संख्या को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में अंतर भी सामने आया है। दैनिक जागरण ने चार्जशीट को 73,480 पन्नों का बताते हुए 173 गवाहों के बयान होने की जानकारी दी है, जबकि अमर उजाला ने 36,039 पन्नों और 133 गवाहों का उल्लेख किया है। ऐसे में इन संख्याओं को संबंधित मीडिया रिपोर्टों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पुलिस के आरोपपत्र में आपराधिक न्यासभंग, चोरी या गबन की संपत्ति रखने, आपराधिक साजिश और साझा मंशा से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख है। अब अदालत में आरोपपत्र और पुलिस द्वारा पेश साक्ष्यों की न्यायिक जांच होगी। आठ आरोपियों पर लगे आरोप सिद्ध हुए हैं या नहीं, इसका अंतिम फैसला अदालत करेगी।