लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नकली नोटों से जुड़ा एक और मामला सामने आने के बाद बैंकिंग और प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मच गई है। प्रदेश के एक जिले में बैंक की करेंसी चेस्ट में जांच के दौरान लाखों रुपये मूल्य के कथित नकली नोट मिलने की बात सामने आई है। बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और इनके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है या नहीं।
करेंसी चेस्ट बैंकों की वह सुरक्षित व्यवस्था होती है, जहां भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी मुद्रा को रखा जाता है। बैंकों की शाखाओं में नकदी की जरूरत इसी व्यवस्था के माध्यम से पूरी की जाती है। ऐसे में करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने का मामला बेहद गंभीर माना जाता है। संदिग्ध नोटों की पहचान होने के बाद उनकी गिनती और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है।
मामला सामने आने के बाद बैंक अधिकारियों के साथ संबंधित एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। प्रारंभिक स्तर पर यह पता लगाया जा रहा है कि नकली नोट अलग-अलग बैंक शाखाओं से जमा होकर करेंसी चेस्ट तक पहुंचे या किसी खास स्रोत से बड़ी संख्या में इन्हें जमा कराया गया। इसके लिए नकदी जमा करने से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैंकिंग व्यवस्था में नकली नोट मिलने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें सामान्य मुद्रा से अलग कर दिया जाता है। इसके बाद उनकी जानकारी संबंधित अधिकारियों और आवश्यकतानुसार पुलिस को दी जाती है। नकली नोट को दोबारा प्रचलन में नहीं लाया जा सकता। जांच में नोटों के सुरक्षा फीचर, प्रिंटिंग, कागज और अन्य निशानों को भी देखा जाता है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाखों रुपये के संदिग्ध नोट आखिर बैंकिंग सिस्टम में कैसे पहुंचे। यदि ये नोट अलग-अलग ग्राहकों की जमा रकम से आए हैं तो उनके स्रोत की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं अगर बड़ी संख्या में नोट किसी एक जगह या खाते के माध्यम से जमा हुए हैं तो जांच एजेंसियों के लिए उनके स्रोत तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
नकली भारतीय मुद्रा का प्रचलन अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिहाज से गंभीर मामला है। इसी कारण बैंकों में नोटों की जांच के लिए मशीनों के साथ प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था रहती है। इसके बावजूद अगर संदिग्ध नोट करेंसी चेस्ट तक पहुंचते हैं तो उनकी पूरी श्रृंखला की जांच जरूरी हो जाती है। अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि बरामद संदिग्ध नोट वास्तव में कितनी राशि के हैं, वे किन मूल्यवर्ग के हैं और उनका स्रोत क्या है। फिलहाल मामले से जुड़े आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद नकली नोटों के नेटवर्क या इसमें शामिल लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।