कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में घाटमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से नवजात बच्चे की चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग के एक एसडीओ को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे की चोरी किसी अचानक हुई घटना का हिस्सा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कथित तौर पर एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिस के मुताबिक, एसडीओ ने बेटे की चाहत में संविदा पर तैनात एक एएनएम से बच्चा चोरी कराने की कथित डील की थी। इसके लिए पांच लाख रुपये देने की बात सामने आई है। मामले में एएनएम को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अब एसडीओ को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
घटना घाटमपुर सीएचसी में 10 मई की बताई जा रही है। बम्हौरी गांव निवासी अवनीश की पत्नी मंजू को प्रसव पीड़ा के बाद घाटमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उसने एक बच्चे को जन्म दिया। अस्पताल में दिनभर एक महिला की गतिविधियां भी देखी गईं। रात करीब नौ बजे यह महिला मंजू के बेड के पास पहुंची। आरोप है कि मौका मिलते ही उसने नवजात बच्चे को उठाया और उसे एक झोले में रखकर अस्पताल से बाहर निकलने लगी।
बच्चे को उठाकर ले जाते हुए मंजू की नजर महिला पर पड़ गई। उसने तुरंत शोर मचा दिया। शोर सुनकर अस्पताल में मौजूद लोगों और कर्मचारियों ने महिला का पीछा किया और उसे अस्पताल के गेट के पास ही पकड़ लिया। उसके पास से नवजात बच्चा बरामद कर लिया गया। इस तरह समय रहते बच्चे को चोरी होने से बचा लिया गया।
पकड़ी गई महिला की पहचान बांदा के बबेरू थाना क्षेत्र के अनुवान गांव निवासी विनोद की पत्नी 42 वर्षीय गीता के रूप में हुई। पुलिस जांच में पता चला कि वह पुखरायां के देवीपुर क्षेत्र में संविदा पर एएनएम के पद पर काम कर रही थी। शुरुआती पूछताछ में महिला ने पुलिस को कई तरह की बातें बताकर मामले को टालने की कोशिश की, लेकिन बाद में उसने बच्चे को चोरी करने की बात स्वीकार कर ली। हालांकि, पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर एसडीओ का नाम नहीं बताया।
पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन जांच को यहीं खत्म नहीं किया गया। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की जांच शुरू की और कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर खंगाली। जांच के दौरान पुलिस को एक बिजली विभाग के एसडीओ से महिला की लगातार और काफी अधिक बातचीत होने की जानकारी मिली। पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों को जोड़कर मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
पुलिस के मुताबिक, महिला की बातचीत महोबा में तैनात एसडीओ रामकुमार वर्मा से नियमित रूप से होती थी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड में दोनों के बीच लगातार संपर्क सामने आने के बाद पुलिस का शक गहरा गया। इसके बाद जांच टीम ने एसडीओ से पूछताछ की और रविवार को उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान एसडीओ ने कथित तौर पर अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी की दो बेटियां हैं और वह बेटे की चाहत रखता था। इसी इच्छा के चलते उसने एएनएम से संपर्क किया और नवजात बच्चे को चोरी करने के लिए पांच लाख रुपये देने का लालच दिया। पुलिस का दावा है कि इसी सौदे के तहत महिला ने घाटमपुर सीएचसी में नवजात को चोरी करने की कोशिश की थी।
पुलिस के अनुसार, एसडीओ मूल रूप से सजेती थाना क्षेत्र के सूखापुर गांव का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद उससे मामले को लेकर विस्तृत पूछताछ की गई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस साजिश में दोनों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। साथ ही पुलिस कथित पांच लाख रुपये की डील और दोनों आरोपियों के बीच हुई बातचीत से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
इस पूरे मामले में अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फुटेज में महिला के बच्चे को लेकर अस्पताल से बाहर निकलने की कोशिश करने की तस्वीरें कैद हुई थीं। इसी के आधार पर तत्काल कार्रवाई कर नवजात को बरामद कर लिया गया था। बाद में मोबाइल और सीडीआर की जांच ने पुलिस को कथित साजिश के दूसरे आरोपी तक पहुंचने में मदद की।
फिलहाल पुलिस ने एएनएम और एसडीओ दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस मामले में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और आरोपियों के बयानों के आधार पर आगे की जांच कर रही है। नवजात के सुरक्षित बरामद होने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन सरकारी अस्पताल से बच्चे की कथित चोरी की साजिश ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और नवजातों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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