गंगा एक्सप्रेसवे पर पलटी 150 यात्रियों से भरी डबल डेकर बस, 20 से ज्यादा घायल
संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में बुधवार, 28 अक्टूबर की तड़के बड़ा सड़क हादसा हो गया। गंगा एक्सप्रेसवे पर पवांसा के पास यात्रियों से खचाखच भरी एक निजी डबल डेकर स्लीपर बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में 20 से अधिक यात्री घायल हो गए। बस में लगभग 150 से 200 यात्रियों के सवार होने की जानकारी सामने आई है। इनमें अधिकांश प्रवासी मजदूर और उनके परिवार के सदस्य थे, जो पंजाब और हरियाणा से दीपावली तथा छठ पूजा का त्योहार मनाने बिहार स्थित अपने घर लौट रहे थे। हादसे के बाद बस में चीख-पुकार मच गई। कई यात्री सामान और सीटों के बीच फंस गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा घायलों को बस से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। यात्रियों ने आरोप लगाया कि चालक नशे की हालत में था, जिसके कारण बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
गंगा एक्सप्रेसवे पर तड़के हुआ भीषण हादसा
जानकारी के अनुसार, हादसा संभल जिले के पवांसा क्षेत्र के पास गंगा एक्सप्रेसवे पर हुआ। निजी डबल डेकर स्लीपर बस हरियाणा से बिहार की ओर जा रही थी।
बस में बड़ी संख्या में मजदूर, महिलाएं और बच्चे यात्रा कर रहे थे। अधिकांश यात्री त्योहार मनाने अपने घर लौट रहे थे।
तड़के बस अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क पर पलट गई। हादसे के समय कई यात्री सो रहे थे।
अचानक जोरदार झटका लगने से बस में अफरा-तफरी फैल गई। यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई लोग चोटिल हो गए।
घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया।
बस में क्षमता से अधिक यात्री, सुरक्षा पर उठे सवाल
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त बस में लगभग 150 से 200 यात्री सवार बताए जा रहे हैं।
एक प्रकाशित रिपोर्ट में करीब 150 यात्रियों के सवार होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, कुछ विवरणों में संख्या 200 तक बताई गई है।
यह संख्या सामान्य डबल डेकर स्लीपर बस की स्वीकृत यात्री क्षमता से काफी अधिक हो सकती है।
बस की वास्तविक पंजीकृत क्षमता और उसमें सवार यात्रियों की सही संख्या की पुष्टि परिवहन विभाग की जांच से होगी।
क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जोखिम पैदा करता है। विशेषकर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान आपात स्थिति में यात्रियों को बस से सुरक्षित निकालना मुश्किल हो सकता है।
दिवाली और छठ मनाने बिहार लौट रहे थे मजदूर
दुर्घटनाग्रस्त बस में अधिकांश लोग पंजाब और हरियाणा में काम करने वाले प्रवासी मजदूर थे।
ये यात्री त्योहारों के अवसर पर अपने परिवारों के साथ बिहार लौट रहे थे। इनमें पूर्णिया, दरभंगा, सुपौल और सीतामढ़ी सहित विभिन्न जिलों के लोग शामिल बताए गए हैं।
त्योहारी सीजन में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने पैतृक गांव लौटते हैं।
इस दौरान रेलगाड़ियों में अधिक भीड़ होने के कारण कई लोग निजी बसों का सहारा लेते हैं।
लंबी दूरी की निजी बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ने से क्षमता से अधिक सवारी बैठाने की समस्या सामने आती है।
संभल का यह हादसा भी त्योहारी यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और निजी बसों की निगरानी से जुड़े सवाल खड़े करता है।
हादसे के बाद यात्रियों में मची चीख-पुकार
बस पलटते ही अंदर बैठे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
कई यात्री सीटों और सामान के बीच फंस गए। महिलाएं और बच्चे मदद के लिए आवाज लगाने लगे।
हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और राहत दल घटनास्थल पर पहुंचे।
बचावकर्मियों ने घायलों को बस से बाहर निकाला और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।
घटना के बाद एक्सप्रेसवे पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
पुलिस ने दुर्घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था संभाली, ताकि राहत कार्यों के दौरान किसी अन्य वाहन से हादसा न हो।
20 से अधिक घायल, जिला अस्पताल में उपचार
इस सड़क दुर्घटना में 20 से अधिक यात्रियों के घायल होने की पुष्टि हुई है।
घायलों को एंबुलेंस और अन्य उपलब्ध साधनों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया।
दैनिक जागरण की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, घायल यात्रियों को संभल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है।
फिलहाल सभी घायलों की पहचान और उनकी चिकित्सकीय स्थिति का विस्तृत आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।
पुलिस और प्रशासन घायलों की जानकारी जुटाने तथा उनके परिजनों से संपर्क करने की प्रक्रिया में जुटे हैं।
चालक पर नशे में बस चलाने का आरोप
हादसे के बाद कुछ यात्रियों ने बस चालक पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
यात्रियों का कहना है कि चालक कथित रूप से नशे की हालत में वाहन चला रहा था। इसी कारण बस पर उसका नियंत्रण नहीं रहा और हादसा हो गया।
हालांकि, चालक के नशे में होने की पुष्टि किसी मेडिकल जांच या पुलिस की अंतिम रिपोर्ट से नहीं हुई है।
दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए चालक की स्थिति, वाहन की गति और बस की तकनीकी दशा की जांच जरूरी होगी।
इसके अतिरिक्त यह भी पता लगाना होगा कि चालक लगातार कितने समय से वाहन चला रहा था और उसे पर्याप्त आराम मिला था या नहीं।
निजी बसों में ओवरलोडिंग बनी बड़ी चुनौती
त्योहारी मौसम में बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली निजी बसों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से बिहार जाने वाले मार्गों पर प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में सफर करते हैं।
इस दौरान निजी बस संचालकों द्वारा निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
नियमों के अनुसार, प्रत्येक बस के लिए परिवहन विभाग द्वारा यात्रियों की अधिकतम संख्या निर्धारित की जाती है।
निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना यातायात नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
इससे दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों को गंभीर चोट लगने का जोखिम बढ़ सकता है।
जुलाई में भी गंगा एक्सप्रेसवे पर हुआ था हादसा
संभल जिले में गंगा एक्सप्रेसवे पर बस दुर्घटना का यह पहला मामला नहीं है।
26 जुलाई 2026 को बहजोई क्षेत्र में एक निजी डबल डेकर बस पलट गई थी।
उस दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी और 25 से अधिक यात्री घायल हुए थे।
बस बहराइच से पंजाब के जालंधर जा रही थी। प्रारंभिक जांच में चालक को झपकी आने की आशंका जताई गई थी।
उस घटना के बाद भी लंबी दूरी की निजी बसों में यात्रियों की सुरक्षा और चालकों की थकान जैसे मुद्दे चर्चा में आए थे।
हादसे की जांच में जुटा प्रशासन
संभल में हुए ताजा हादसे के बाद पुलिस दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
जांच में बस की वास्तविक यात्री क्षमता, परिवहन परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और चालक से संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
यदि बस में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री सवार पाए जाते हैं तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इसके साथ ही दुर्घटना के लिए चालक की लापरवाही या किसी तकनीकी खराबी की भूमिका की भी जांच आवश्यक होगी।
फिलहाल पुलिस का मुख्य ध्यान घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने पर है।
यह दुर्घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि त्योहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ सड़क सुरक्षा और वाहनों की निगरानी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।