गोरखपुर। सिविल कोर्ट के अधिवक्ता आदित्य त्रिपाठी के पिता और बिजली विभाग के ठेकेदार शिवकुमार त्रिपाठी की हत्या के बाद रविवार को अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। हत्या से नाराज अधिवक्ताओं ने रविवार सुबह पोस्टमार्टम हाउस के सामने गोरखपुर-महराजगंज मार्ग जाम कर दिया। अधिवक्ता सड़क पर बैठ गए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे।
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने हत्यारों को फांसी देने और मृतक के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग उठाई। सड़क जाम होने के कारण मार्ग पर आवागमन प्रभावित हुआ और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। अधिवक्ताओं का कहना था कि शिवकुमार त्रिपाठी की हत्या गंभीर घटना है और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए पुलिस-प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
हत्या की खबर से अधिवक्ताओं में आक्रोश
शिवकुमार त्रिपाठी के बेटे आदित्य त्रिपाठी सिविल कोर्ट में अधिवक्ता हैं। अपने साथी अधिवक्ता के पिता की हत्या की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ता पोस्टमार्टम हाउस के पास पहुंच गए। रविवार सुबह उन्होंने हत्या के विरोध में सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
अधिवक्ताओं ने कहा कि घटना को लेकर उनके बीच गहरा आक्रोश है। उनका कहना था कि हत्या के आरोपियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा मिल सके।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने हत्यारों को फांसी देने की मांग को प्रमुखता से उठाया। इसके साथ ही उन्होंने मृतक के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की।
पोस्टमार्टम हाउस के सामने लगाया जाम
अधिवक्ताओं ने पोस्टमार्टम हाउस के सामने गोरखपुर-महराजगंज मार्ग पर बैठकर सड़क जाम कर दी। मार्ग पर प्रदर्शन शुरू होने से यातायात प्रभावित हुआ। सड़क पर मौजूद लोगों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पुलिस और प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई। अधिकारियों की ओर से प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं को समझाने का प्रयास किया गया। हालांकि, अधिवक्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक हत्या के मामले में कड़ी कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आक्रोश बना रहेगा।
परिवार की सुरक्षा की उठी मांग
अधिवक्ताओं ने मृतक के परिवार की सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता जताई। उनका कहना था कि शिवकुमार त्रिपाठी की हत्या के बाद परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने मांग की कि परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि परिजन भयमुक्त होकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सकें। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि हत्या के मामले की जांच गंभीरता और निष्पक्षता से होनी चाहिए।
मृतक के बेटे के अधिवक्ता होने के कारण इस घटना का असर न्यायिक समुदाय में भी देखने को मिला। साथी अधिवक्ताओं ने घटना पर दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही।
आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने पुलिस-प्रशासन से हत्या के आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि किसी भी स्थिति में दोषियों को कानून के शिकंजे से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।
अधिवक्ताओं ने हत्या की घटना को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया और कहा कि न्याय मिलने तक वे पीड़ित परिवार के साथ रहेंगे। उन्होंने प्रशासन से मामले में तेजी से कार्रवाई करने और आरोपियों को जल्द से जल्द कानून के सामने लाने की मांग की।
सड़क जाम से यातायात प्रभावित
गोरखपुर-महराजगंज मार्ग पर जाम लगने के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। रविवार सुबह मार्ग पर आवाजाही कर रहे लोगों को प्रदर्शन के कारण परेशानी हुई। पुलिस की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने और यातायात सामान्य कराने के प्रयास किए गए।
सड़क जाम के दौरान अधिवक्ता लगातार अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे। मौके पर मौजूद लोगों की निगाहें भी प्रदर्शन और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी रहीं।
न्याय की मांग पर अड़े अधिवक्ता
अधिवक्ताओं का कहना था कि शिवकुमार त्रिपाठी की हत्या ने उन्हें झकझोर दिया है। उनका कहना था कि मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान हत्यारों को फांसी देने की मांग प्रमुख रही। अधिवक्ताओं ने कहा कि हत्या जैसी गंभीर घटना में दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल पोस्टमार्टम हाउस के सामने हुए प्रदर्शन ने मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा दिया है। अधिवक्ताओं के विरोध के बीच अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर है।
शिवकुमार त्रिपाठी की हत्या से परिवार के साथ-साथ अधिवक्ता समुदाय में भी गहरा आक्रोश है। रविवार सुबह सड़क पर उतरकर अधिवक्ताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की और स्पष्ट संदेश दिया कि वे मामले में कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार की सुरक्षा चाहते हैं।