नोएडा : उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो में एयरपोर्ट टर्मिनल के अंदर भारी जलभराव जैसा दृश्य दिखाया गया है, जिसे लेकर कई लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। हालांकि, एयरपोर्ट प्रबंधन ने इस वीडियो को भ्रामक बताते हुए कहा है कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया फर्जी वीडियो है और टर्मिनल भवन के अंदर कभी भी जलभराव नहीं हुआ।

एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो वास्तविक घटना को नहीं दिखाता है। वीडियो में दिखाए गए दृश्य कृत्रिम तरीके से बनाए गए हैं और इनका नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की वास्तविक स्थिति से कोई संबंध नहीं है। प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि बिना सत्यापन के ऐसे वीडियो को साझा न करें। बताया गया कि हाल ही में कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एयरपोर्ट परिसर के अंदर पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा था। वीडियो को देखकर कई यूजर्स ने एयरपोर्ट के निर्माण और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए। इसके बाद एयरपोर्ट प्रबंधन ने मामले का संज्ञान लेते हुए स्थिति स्पष्ट की।
प्रबंधन ने कहा कि निर्माणाधीन एयरपोर्ट में बारिश के पानी की निकासी के लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया गया है। पूरे परिसर में जल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन तैयार किया गया है, ताकि किसी भी मौसम में संचालन प्रभावित न हो। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े आगामी एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसके निर्माण को लेकर लगातार काम चल रहा है और यहां अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन ने कहा कि परियोजना की प्रगति को लेकर समय-समय पर आधिकारिक जानकारी साझा की जाती है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और तस्वीरों की सत्यता जरूर जांचें। AI तकनीक के जरिए बनाए जा रहे फर्जी कंटेंट से भ्रम फैल सकता है और किसी भी परियोजना की छवि प्रभावित हो सकती है।
एयरपोर्ट प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि टर्मिनल बिल्डिंग के अंदर जलभराव की कोई घटना नहीं हुई है। वायरल वीडियो को लेकर आवश्यक निगरानी रखी जा रही है और गलत जानकारी फैलाने वाले कंटेंट पर भी नजर रखी जा रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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