सपा के वोट बैंक पर ओवैसी की नजर, मुस्लिम बहुल सीटों पर बढ़ाई सक्रियता

Update: 2026-08-01 10:52 GMT

उत्तर प्रदेश  :  अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने प्रदेश में अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी एक तरफ समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के मजबूत क्षेत्रों में रैलियां कर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा को रोकने के नाम पर चुनाव पूर्व गठबंधन की संभावनाओं को भी खुला रख रही है।

ओवैसी पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। उन्होंने मुस्लिम बहुल इलाकों में कई जनसभाएं की हैं और इन रैलियों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। AIMIM का दावा है कि मुस्लिम समाज को अब केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी मिलना चाहिए।

पिछले डेढ़ महीने के दौरान ओवैसी ने बहराइच, बिजनौर, सहारनपुर और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में रैलियां की हैं। इन इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है और इन्हें सपा का प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। ओवैसी ने अपनी सभाओं में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी के मुस्लिम नेताओं पर सवाल उठाए हैं।

ओवैसी का कहना है कि लंबे समय से मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित राजनीतिक भागीदारी नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को लेकर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई और चुनावों के समय ही उनकी चिंता करती है।

AIMIM प्रमुख ने अपने अभियान की शुरुआत बहराइच के मटेरा क्षेत्र से की, जहां समाजवादी पार्टी पिछले तीन चुनावों से जीत दर्ज करती रही है। यहां ओवैसी ने AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को उम्मीदवार घोषित कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के पुराने राजनीतिक चेहरे चुनाव के समय ही सक्रिय होते हैं।

ओवैसी ने भाजपा के खिलाफ संभावित गठबंधन को लेकर भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई दल भाजपा को रोकने के लिए गंभीर है और AIMIM को सम्मानजनक हिस्सेदारी देता है तो पार्टी साथ आने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने के लिए चुनाव मैदान में उतर रही है।

बिजनौर के नजीबाबाद में आयोजित सभा में ओवैसी ने सपा विधायक तसलीम अहमद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता के प्रतिनिधियों को लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने संभल मस्जिद विवाद और समाजवादी पार्टी की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति पर भी सवाल उठाए।

सहारनपुर में भी ओवैसी ने सपा और कांग्रेस को निशाने पर रखा। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के प्रभाव वाले इलाके में उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं से अपनी राजनीतिक सोच बदलने की अपील की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से एक ही पार्टी को समर्थन देने के बावजूद मुस्लिम समाज को राजनीतिक लाभ नहीं मिला है।

ओवैसी ने अखिलेश यादव को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने लगातार समाजवादी पार्टी का समर्थन किया, लेकिन बदले में उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे अपनी राजनीतिक ताकत को समझें और अपने हितों के आधार पर फैसला करें।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, AIMIM की रणनीति उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश है। पार्टी पहले भी कई राज्यों में मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव लड़ चुकी है और अब यूपी में भी अपना विस्तार करना चाहती है।

हालांकि, उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM के सामने बड़ी चुनौती सपा और कांग्रेस जैसे स्थापित दलों के वोट बैंक में सेंध लगाना है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ओवैसी की रणनीति कितना असर दिखाती है और चुनावी समीकरणों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

Tags:    

Similar News