वाराणसी। उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनाव के परिणामों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर जीत का परचम लहराया है। सपा के निवर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव ने भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को करारी शिकस्त देकर लगातार दूसरी बार इस सीट पर कब्जा बरकरार रखा है। वहीं, वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला जारी है। इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने आशुतोष सिन्हा को दोबारा मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा की ओर से केदार सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। शिक्षक सीट पर जीत के बाद सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।
शिक्षक एमएलसी सीट पर सपा की बड़ी जीत
वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 5,015 मतों से पराजित किया। अंतिम मतगणना के अनुसार लाल बिहारी यादव को कुल 11,612 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार डॉ. प्रमोद मिश्रा को 6,597 वोट प्राप्त हुए।
पहली वरीयता के मतों की गिनती में लाल बिहारी यादव को 10,958 और भाजपा प्रत्याशी को 6,060 वोट मिले थे। इस चरण में सपा उम्मीदवार ने 4,898 मतों की बढ़त बना ली थी। हालांकि, निर्धारित जीत का कोटा पूरा नहीं होने के कारण दूसरी वरीयता के मतों की गणना करनी पड़ी। इसके बाद लाल बिहारी यादव की जीत सुनिश्चित हुई।
इस जीत को समाजवादी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और भाजपा यहां अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
पिछले चुनाव की तरह इस बार भी भाजपा को शिकस्त
वाराणसी की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटों पर पिछले चुनाव में भी समाजवादी पार्टी ने भाजपा को पराजित किया था। वर्ष 2020 के चुनाव में सपा के लाल बिहारी यादव शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी हुए थे, जबकि आशुतोष सिन्हा ने स्नातक सीट पर जीत हासिल की थी।
इस बार भी समाजवादी पार्टी ने दोनों मौजूदा एमएलसी पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा उम्मीदवार बनाया। सपा की रणनीति थी कि पुराने प्रत्याशियों के अनुभव और मतदाताओं के बीच उनकी सक्रियता का लाभ पार्टी को मिलेगा।
शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव की जीत से पार्टी की यह रणनीति सफल होती दिखाई दी है। वहीं, स्नातक सीट का अंतिम परिणाम सामने आने के बाद दोनों दलों की स्थिति और स्पष्ट होगी।
स्नातक सीट पर सपा और भाजपा के बीच मुकाबला
वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा और भारतीय जनता पार्टी के केदार सिंह के बीच सीधा मुकाबला है। शिक्षक सीट का परिणाम घोषित होने के बाद स्नातक सीट की मतगणना जारी रही।
इस निर्वाचन क्षेत्र में मतों की गिनती जटिल प्रक्रिया के तहत होती है। मतदाताओं द्वारा उम्मीदवारों को दी गई वरीयता के आधार पर परिणाम तय किया जाता है। इसलिए अंतिम परिणाम आने में समय लग सकता है।
समाजवादी पार्टी ने स्नातक सीट पर भी जीत का दावा किया है। हालांकि, अंतिम आधिकारिक परिणाम आने तक किसी भी उम्मीदवार की जीत निश्चित नहीं मानी जा सकती।
भाजपा के बागी उम्मीदवार ने भी बिगाड़ा समीकरण
वाराणसी शिक्षक एमएलसी चुनाव में भाजपा की हार के पीछे बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कई उम्मीदवार मैदान में थे, जिससे मतों का बंटवारा हुआ।
भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा ने पिछले चुनाव में भी किस्मत आजमाई थी। उस समय उन्हें 6,830 वोट मिले थे। इस चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हुए थे और पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था।
हालांकि, भाजपा का समर्थन मिलने के बावजूद वह चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सके। पहली वरीयता में उन्हें पिछले चुनाव की तुलना में भी कम वोट मिले।
इस परिणाम ने भाजपा के सामने शिक्षक मतदाताओं के बीच अपने समर्थन को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।
सपा कार्यकर्ताओं ने मनाया जीत का जश्न
लाल बिहारी यादव की जीत की खबर सामने आते ही वाराणसी में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। पार्टी कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का जश्न मनाया और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
समर्थकों ने इसे शिक्षकों के विश्वास और समाजवादी पार्टी की नीतियों की जीत बताया। वहीं, सपा नेताओं ने कहा कि चुनाव परिणाम से स्पष्ट है कि शिक्षक वर्ग ने एक बार फिर पार्टी के उम्मीदवार पर भरोसा जताया है।
पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस जीत से संगठन को आगामी चुनावों की तैयारियों में मजबूती मिलेगी।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा को मिला उत्साह
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में वाराणसी शिक्षक एमएलसी सीट पर भाजपा की हार और समाजवादी पार्टी की जीत को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सपा इस परिणाम को अपने पक्ष में बने राजनीतिक माहौल के संकेत के रूप में देख रही है। दूसरी ओर भाजपा के लिए प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र से जुड़े निर्वाचन क्षेत्र में हार राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।
हालांकि, शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव आम विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं। इनमें केवल पात्र और पंजीकृत मतदाता ही मतदान कर सकते हैं। इसलिए इन परिणामों को सीधे विधानसभा चुनाव के जनादेश से जोड़ना उचित नहीं होगा।
इसके बावजूद सपा को मिली जीत विपक्षी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
यूपी की दूसरी एमएलसी सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन
वाराणसी में हार के बावजूद उत्तर प्रदेश के अन्य विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने भी महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। मेरठ-सहारनपुर स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश गोयल और मेरठ शिक्षक सीट पर श्रीचंद शर्मा ने जीत दर्ज की।
इसी तरह बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के हरि सिंह ढिल्लों विजयी हुए। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला जारी है।
वाराणसी में लाल बिहारी यादव की जीत ने समाजवादी पार्टी को नई राजनीतिक ऊर्जा दी है। अब सभी की निगाहें स्नातक एमएलसी सीट के अंतिम नतीजे पर टिकी हैं। यदि सपा इस सीट को भी बरकरार रखने में सफल होती है तो यह वाराणसी में पार्टी के लिए लगातार दूसरी बार दोहरी सफलता होगी।