crores की ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया, 34 करोड़ के लेनदेन की जांच शुरू
Jaunpur जौनपुर : उत्तर प्रदेश के जौनपुर में पुलिस ने बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। फर्जी मल्टी लेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड स्कीम के जरिए युवाओं को जाल में फंसाने वाले गिरोह के सरगना समेत सात आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरोह के कब्जे से 11 मोबाइल फोन, एक लग्जरी थार कार, एक बुलेट और एक पल्सर मोटरसाइकिल बरामद की है। वहीं, गिरोह के चंगुल में फंसे करीब 30 युवक-युवतियों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया।
मंगलवार को मामले का खुलासा करते हुए क्षेत्राधिकारी नगर गोल्डी गुप्ता ने बताया कि थाना लाइन बाजार पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग फर्जी कंपनी बनाकर बेरोजगार युवाओं से ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क का खुलासा किया और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी "एमएस अर्थ इंटरप्राइजेज" नाम की फर्जी कंपनी और "रॉयल हेल्थ इंडिया" की फ्रेंचाइजी के नाम पर ठगी का बड़ा नेटवर्क चला रहे थे। गिरोह के सदस्य बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के बेरोजगार युवाओं को फोन कर अपने जाल में फंसाते थे।
आरोपित युवाओं को टाटा कंपनी या कृषि क्षेत्र में 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी दिलाने का लालच देते थे। इसके बाद उन्हें वाराणसी बुलाया जाता था, जहां कॉरपोरेट ऑफिस जैसा माहौल तैयार कर उनका इंटरव्यू लिया जाता था। नौकरी देने और रजिस्ट्रेशन के नाम पर प्रत्येक युवक से 30 से 35 हजार रुपये तक वसूले जाते थे।
पुलिस के मुताबिक, पैसे लेने के बाद युवाओं को एक सामान्य किट दी जाती थी, जिसमें कपड़े, तेल, साबुन समेत कुछ अन्य सामान शामिल होते थे। इसके बाद उन्हें कंपनी के ट्रेनिंग सेंटर में रखा जाता था, जहां उनका मानसिक रूप से ब्रेनवॉश किया जाता था।
गिरोह के सदस्य युवाओं को जल्द अमीर बनने और लग्जरी जीवन जीने के सपने दिखाते थे। इसके बाद उन्हें अपने रिश्तेदारों और परिचितों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने के लिए मजबूर किया जाता था। प्रत्येक सदस्य को कम से कम तीन नए लोगों को जोड़ने का लक्ष्य दिया जाता था। लक्ष्य पूरा नहीं करने पर वेतन रोकने और जमा धनराशि वापस नहीं करने की धमकी दी जाती थी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के कथित संचालक राहुल राजभर के यूनियन बैंक खाते से करीब 34 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। पुलिस अब बैंक खातों, वित्तीय गतिविधियों और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान राहुल राजभर पुत्र शिव शंकर राजभर निवासी वाराणसी, संतोष कुमार पटेल पुत्र अच्छेलाल पटेल निवासी बांदा, हवलदार पुत्र स्वर्गीय खुशी लाल पाल निवासी सुल्तानपुर, प्रदीप पाल पुत्र सुकरन पाल निवासी सुल्तानपुर, चंदन दोहरे पुत्र बादशाह दोहरी निवासी कन्नौज, रितेश राजभर पुत्र मोखन प्रसाद निवासी जौनपुर और अरविंद राजभर पुत्र राम आशीष निवासी वाराणसी के रूप में हुई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। साथ ही ठगी के शिकार हुए लोगों की संख्या और नेटवर्क से जुड़े अन्य राज्यों के कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी के नाम पर किसी भी संदिग्ध कंपनी को पैसे देने से पहले उसकी पूरी जांच जरूर करें।