Solan. सोलन। शहरी क्षेत्रों से निकल रहे कचरे ने सोलन को कूड़े का पहाड़ बना दिया है। कूड़ा प्रबंधन जरूरत के अनुसार न होने के कारण सोलन में लेगेसी वेस्ट ही कूड़ा बम बन गया है। इस वेस्ट से सरसा और अश्वनी खड्ड पर प्रदूषित होने का खतरा मंडरा रहा है। सोलन के शहरी क्षेत्रों से हर दिन औसतन 70 टन कूड़ा कचरा निकल रहा है। इसमें से बद्दी, नालागढ़ और परवाणू क्षेत्रों से ही 35 टन कचरा कूड़े का पहाड़ बना रहा है। इस कूड़े के पहाड़ पर एनजीटी और हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी नजर रख रहे हैं। सोलन शहर की सलोगड़ा स्थिति डंपिंग साइट पर ही करीब 1123 टन का लेगेसी वेस्ट का पहाड़ खड़ा हो गया है। इस डंपिग साइट से नीचे अश्वनी खड्ड बहती है और कूड़े-कचरे के कारण ही पानी के प्रदूषित होने का खतरा बना रहता है।
सोलन शहर से हर दिन औसतन 35 से 40 टन कूड़ा निकल रहा है। इसके बाद सबसे अधिक कूड़ा बद्दी शहरी क्षेत्र से आ रहा है। बद्दी से हर दिन 25 से 30 टन कूड़ा बाहर आ रहा है। नालागढ़ से चार टन के करीब, परवाणू से तीन टन के करीब और अर्की तथा कंडाघाट से दो टन के करीब कूड़ा हर दिन आता है। इस कूड़े का निष्पादन के तौर तरीकों से सबंधित विभाग और कोर्ट भारी भरकम जुर्माना भी लगा रहे हैं, बावजूद इसके कूड़ा का पहाड़ बढ़ता ही जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सोलन के शहरी क्षेत्रों में कूड़ा कचरे का प्रबंधन ठीक से न होने पर एनजीटी, हिमाचल हाई कोर्ट और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पेनल्टी लगाई गई है। सोलन नगर निगम पर लेगेसी वेस्ट का प्रबंधन न होने पर नौ लाख रुपए और परवाणू नगर परिषद पर 11.85 लाख की पेनल्टी लगाई गई। माजरा में वेस्ट मैनेजमेंट न होने पर 6.1 लाख का जुर्माना तक लगाया गया है। इसके अवाला अन्य औद्योगिक इकाइयों और एसटीपी पर भी करोड़ों से वेस्ट मैनेजमेंट न किए जाने पर मुआवजा वसूला गया है।