रिटायरमेंट से 21 दिन पहले RIICO के सीनियर DGM रिश्वत लेते गिरफ्तार
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Ajmer. अजमेर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) के सीनियर डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM) और एक जूनियर असिस्टेंट को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दोनों अधिकारियों पर औद्योगिक प्लॉट से जुड़े अलग-अलग लंबित कार्यों के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। खास बात यह है कि गिरफ्तार किए गए सीनियर डीजीएम अंजय विश्वकर्मा 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले थे और उनकी रिटायरमेंट में केवल 21 दिन शेष थे।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार, कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद की गई। शिकायतकर्ता ने एसीबी को बताया था कि सरथाना इंडस्ट्रियल एरिया में आवंटित औद्योगिक प्लॉट से संबंधित दो अलग-अलग कार्यों के लिए RIICO के अधिकारियों द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत में कहा गया कि प्लॉट का पट्टा जारी करने तथा प्रोडक्ट चेंज (उद्योग परिवर्तन) की अनुमति देने के एवज में अधिकारियों ने अलग-अलग रकम मांगी थी।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पहले पूरे मामले का सत्यापन किया। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर ब्यूरो ने योजनाबद्ध तरीके से अजमेर और ब्यावर में एक साथ ट्रैप कार्रवाई की। इस दौरान अजमेर में तैनात RIICO के यूनिट हेड एवं सीनियर डिप्टी जनरल मैनेजर अंजय विश्वकर्मा को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं ब्यावर में RIICO के जूनियर असिस्टेंट कमलेश गुर्जर को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए दबोच लिया गया।
एसीबी के एडिशनल एसपी मनोज गुप्ता ने बताया कि दोनों अधिकारी एक ही औद्योगिक प्लॉट से जुड़े अलग-अलग कार्यों के लिए रिश्वत मांग रहे थे। जूनियर असिस्टेंट कमलेश गुर्जर के पास प्लॉट का पट्टा जारी करने की फाइल लंबित थी, जबकि यूनिट हेड अंजय विश्वकर्मा के पास प्रोडक्ट चेंज की अनुमति से संबंधित फाइल लंबित थी। दोनों ने अपने-अपने स्तर पर काम करने के बदले अलग-अलग रिश्वत की मांग की थी। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे सीनियर डीजीएम अंजय विश्वकर्मा जयपुर स्थित हेड ब्रांच जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही एसीबी की टीम ने करीब 12 बजे ट्रैप की कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। दूसरी ओर ब्यावर में भी एसीबी की टीम ने समानांतर कार्रवाई करते हुए जूनियर असिस्टेंट को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही उनके आवास, कार्यालय और अन्य संभावित ठिकानों पर तलाशी अभियान भी जारी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं दोनों अधिकारी लंबे समय से इस तरह रिश्वतखोरी में संलिप्त तो नहीं थे और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका रही है। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार सीनियर डीजीएम अंजय विश्वकर्मा की मूल पदस्थापना किशनगढ़ में है, लेकिन उनके पास अजमेर यूनिट का अतिरिक्त प्रभार भी था। वे 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले थे। रिटायरमेंट से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने RIICO और प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए रिश्वतखोरी के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी किसी भी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तत्काल एसीबी को दें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और तथ्यों के सत्यापन के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। फिलहाल एसीबी दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। जांच पूरी होने के बाद मामले में अन्य तथ्य सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।