कौन हैं Captain रितिका खरेता? PM मोदी संग तिरंगा फहराते हुए देखा गया
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नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और इस ऐतिहासिक पल को पूरा देश देखता है. इस बार समारोह के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के ठीक पीछे अनुशासित मुद्रा में खड़ी भारतीय सेना की अधिकारी कैप्टन रितिका खरेता ने सभी का ध्यान खींचा. ध्वजारोहण की आधिकारिक प्रक्रिया में प्रधानमंत्री की सहायता कर रहीं कैप्टन रितिका खरेता की मौजूदगी सिर्फ एक ड्यूटी नहीं थी, बल्कि यह नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका को भी दिखाती है. आज भारतीय महिलाएं सीमा की रक्षा से लेकर देश के बड़े राष्ट्रीय समारोहों तक हर जिम्मेदारी को मजबूती से निभा रही हैं.
लाल किले की प्राचीर से जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा फहराया, तो देश का ध्यान एक पल के लिए उस सैन्य अधिकारी पर भी ठहर गया, जो पूरे अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ उनके पीछे मौजूद थीं. कैप्टन रितिका खरेता की मौजूदगी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के उस दृश्य को और खास बना दिया. प्रधानमंत्री के ध्वजारोहण से जुड़ी औपचारिक सैन्य प्रक्रिया में जिम्मेदारी निभातीं रितिका खरेता सिर्फ एक अधिकारी के तौर पर नजर नहीं आईं बल्कि उस बदलते भारत की तस्वीर भी बनीं, जहां महिलाएं सेना में नेतृत्व की भूमिकाओं से लेकर देश के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोहों तक अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं. 15 अगस्त 2026 के इस खास मौके पर जानते हैं कि लाल किले के इस सैन्य प्रोटोकॉल में उनकी भूमिका क्या थी?
कैप्टन रितिका खरेता भारतीय सेना की अधिकारी हैं, जिन्होंने जनवरी 2025 में 76वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. वह कर्तव्य पथ पर 146 पुरुष जवानों वाली कोर ऑफ सिग्नल्स की मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली अकेली महिला कमांडर थीं. रितिका खरेता दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर और एक शिक्षिका की बेटी हैं. उन्होंने एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, पुष्प विहार से पढ़ाई की और 2016 बैच की छात्रा रहीं. जबलपुर स्थित सिग्नल ट्रेनिंग सेंटर में 12 अधिकारियों में से उनका चयन गणतंत्र दिवस परेड की इस महत्वपूर्ण मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए हुआ था. कर्तव्य पथ पर 146 जवानों का नेतृत्व करते हुए उनकी अनुशासित चाल और आत्मविश्वास ने लोगों का ध्यान खींचा.
लोगों को लगता है कि लाल किले पर तिरंगा फहराना एक आम प्रक्रिया है लेकिन इसके पीछे सशस्त्र बलों की कड़ी मेहनत और प्रोटोकॉल होता है.
इंडा फरहान से लेकर राष्ट्रगान और 21 तोपों की सलामी के बीच 1-1 सेकेंड का तालमेल पहले से ही तय किया जाता है.
हर साल तीनों सेनाओं में से किसी एक को इस समारोह की जिम्मेदारी मिलती है.
जो बात सबसे खास है, वह ये है कि रक्षा मंत्रालय की तरफ से चुने गए अधिकारी को ही प्रधानमंत्री के साथ मंच पर खड़े होकर ध्वज की रस्सियों, सलामी और औपचारिक प्रक्रिया को संभालने का सम्मान मिलता है.
लेकिन जो तस्वीर लाल किले पर कैप्टन रितिका खरेता की वायरल हो रही है, उसने देश की लाखों लड़कियों के मन में देशभक्ति की एक नई अलख जगाई है. आज भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी केवल ऑफिस तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि देश के सबसे बड़े मौकों पर तिरंगे की शान संभालना हो तो महिलाएं हर जगह नेतृत्व कर रही हैं. कैप्टन सोनिया की इस झलक से हर बेटी के मन में बड़े सपनों को पूरा करने की एक जिद बन गई है.
अगर आप या आपके घर की बेटियां कैप्टन रितिका खरेता की तरह भारतीय सेना में अफसर बनकर देश का नाम रोशन करना चाहती हैं, तो इसके लिए किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करें. इसके बाद स्नातक के बाद CDS (Combined Defence Services) की परीक्षा दें. अगर NCC का ‘C’ सर्टिफिकेट है तो NCC Special Entry के जरिए सीधे इंटरव्यू में शामिल हो सकती हैं. रिटन एग्जाम/शॉर्टलिस्टिंग के बाद SSB इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट पास करना होगा. चयनित उम्मीदवारों को ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई में बेहद कठिन सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है.