नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के स्टार तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने टेस्ट क्रिकेट में इतिहास रच दिया है। उन्होंने अपने टेस्ट करियर के 450 विकेट पूरे कर लिए हैं। इस उपलब्धि के साथ स्टार्क ने न केवल एक बड़ा व्यक्तिगत मुकाम हासिल किया, बल्कि सबसे कम गेंदों में 450 टेस्ट विकेट लेने का विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। उन्होंने यह कारनामा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गेबेरहा के सेंट जॉर्ज पार्क में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन किया।
स्टार्क ने दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज वियान मुल्डर को आउट कर 450 विकेट का आंकड़ा छुआ। इसके साथ ही वह टेस्ट क्रिकेट में 450 या उससे अधिक विकेट लेने वाले दुनिया के 10वें गेंदबाज बन गए। खास बात यह है कि वह इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं। उनकी इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी धार बनाए रखना किसी भी तेज गेंदबाज के लिए कितनी बड़ी चुनौती होती है।
सबसे कम गेंदों में 450 विकेट का रिकॉर्ड
मिचेल स्टार्क की इस उपलब्धि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने 450 टेस्ट विकेट लेने के लिए अन्य गेंदबाजों के मुकाबले कम गेंदें फेंकीं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, स्टार्क ने 20,577 गेंदों में यह मुकाम हासिल किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा के नाम था, जिन्होंने 23,474 गेंदों में 450 टेस्ट विकेट पूरे किए थे। स्टार्क ने इस मामले में मैक्ग्रा को पीछे छोड़ दिया।
यह रिकॉर्ड स्टार्क की गेंदबाजी की प्रभावशीलता को दर्शाता है। टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाज को लंबे स्पेल डालने, बल्लेबाजों की तकनीक के अनुसार रणनीति बदलने और अलग-अलग परिस्थितियों में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होती है। स्टार्क ने अपनी गति, स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
ऐसा करने वाले पहले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज
टेस्ट क्रिकेट में 450 विकेट का आंकड़ा छूना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन स्टार्क ने इस रिकॉर्ड को एक और वजह से खास बना दिया। वह टेस्ट इतिहास में 450 विकेट लेने वाले पहले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज बन गए हैं। साथ ही, वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले चौथे ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज भी हैं।
स्टार्क से पहले ऑस्ट्रेलिया के कई दिग्गज गेंदबाज टेस्ट क्रिकेट में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं। शेन वॉर्न और ग्लेन मैक्ग्रा जैसे दिग्गजों की सूची में स्टार्क का नाम जुड़ना उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, स्टार्क की उपलब्धि को खास बनाने वाली बात उनकी बाएं हाथ की तेज गेंदबाजी और कम गेंदों में विकेट हासिल करने की क्षमता है।
109वें टेस्ट में हासिल किया मुकाम
मिचेल स्टार्क ने अपने 109वें टेस्ट मैच में 450 विकेट पूरे किए। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस मुकाम तक पहुंचने के दौरान उनका टेस्ट गेंदबाजी औसत लगभग 26 रहा है। यह आंकड़ा उनके लंबे करियर में विकेट लेने की निरंतरता को दर्शाता है।
स्टार्क की गेंदबाजी की खासियत उनकी तेज रफ्तार और बाएं हाथ से गेंद को स्विंग कराने की क्षमता है। नई गेंद से वह बल्लेबाजों के लिए चुनौती पेश करते हैं, जबकि मैच आगे बढ़ने के साथ रिवर्स स्विंग और सटीक यॉर्कर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। यही वजह है कि वह ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम के अहम तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के लिए भी बड़ी उपलब्धि
450 टेस्ट विकेट पूरे करने के साथ स्टार्क ऑस्ट्रेलिया के उन चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने इस प्रारूप में इतना बड़ा आंकड़ा हासिल किया है। टेस्ट क्रिकेट में सफलता सिर्फ विकेटों की संख्या से नहीं मापी जाती, बल्कि गेंदबाज का टीम को मुश्किल परिस्थितियों से निकालना और लंबे समय तक फिट रहना भी अहम होता है।
स्टार्क ने अपने करियर में अलग-अलग देशों और पिचों पर गेंदबाजी की है। दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। गेबेरहा में हासिल की गई यह उपलब्धि उनके करियर की यादगार उपलब्धियों में शामिल हो गई है।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में रचा इतिहास
ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का भी हिस्सा है। सीरीज के दूसरे टेस्ट में स्टार्क ने मुल्डर को आउट कर अपने 450 विकेट पूरे किए। इस उपलब्धि के बाद मैच में उनकी गेंदबाजी और रिकॉर्ड दोनों चर्चा का विषय बन गए।
मिचेल स्टार्क का यह रिकॉर्ड उनके शानदार करियर में एक और बड़ा अध्याय है। सबसे कम गेंदों में 450 टेस्ट विकेट, इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज और ऑस्ट्रेलिया के चौथे गेंदबाज बनने जैसी उपलब्धियां उन्हें टेस्ट क्रिकेट के विशिष्ट गेंदबाजों की सूची में जगह दिलाती हैं। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर रहेगी कि स्टार्क आने वाले मुकाबलों में अपने विकेटों की संख्या को कहां तक पहुंचाते हैं।