नई दिल्ली/बीजिंग। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। अरुणाचल प्रदेश में कथित झड़प की खबरों के बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया है कि चीनी पक्ष ने संबंधित समझौतों का पालन किया है। चीन के इस बयान को सीमा पर तनाव और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर कई क्षेत्रों में मतभेद बने हुए हैं। अरुणाचल प्रदेश भी दोनों देशों के बीच विवाद का एक प्रमुख विषय रहा है। भारत स्पष्ट रूप से अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा मानता है, जबकि चीन इस क्षेत्र के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता रहा है। भारत ने चीन के इस दावे को लगातार खारिज किया है।
चीन ने गश्त को बताया सामान्य गतिविधि
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसके सैनिकों ने सीमा क्षेत्रों में सामान्य गश्त और नियंत्रण संबंधी गतिविधियां संचालित की हैं। बीजिंग ने दावा किया कि उसकी सेना ने संबंधित द्विपक्षीय समझौतों का सख्ती से पालन किया है।चीनी विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया भारत की ओर से सीमा पर गश्त के निर्धारित तौर-तरीकों में बदलाव को लेकर जताई गई चिंता के बाद सामने आई है। दोनों देशों के बयानों में सीमा पर सैनिक गतिविधियों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाई देते हैं।
भारत ने चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर जताई चिंता
इससे पहले 23 अक्टूबर को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि जब चीनी सैनिक स्थापित गश्ती व्यवस्थाओं से अलग गतिविधियां करते हैं, तब सीमा क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर प्रभावित होती है।उन्होंने स्पष्ट किया था कि भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबित मुद्दों को सुलझाने तथा गलतफहमी से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं।भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के समग्र संबंधों के विकास के लिए आवश्यक है।
आईटीबीपी प्रमुख के बयान से बढ़ी चर्चा
सीमा पर तनाव का मुद्दा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद प्रमुखता से सामने आया।कपूर ने राजस्थान के अलवर में एक कार्यक्रम के दौरान अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की घटनाओं का उल्लेख किया था।हालांकि, उन्होंने सभी संबंधित स्थानों और घटनाओं का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया। इसके बाद सीमा की स्थिति को लेकर सवाल उठे और विदेश मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा गया।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर पुराना विवाद
भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से क्षेत्रीय मतभेद हैं। चीन इस क्षेत्र को लेकर अपना दावा प्रस्तुत करता रहा है, जबकि भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है।दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के कुछ हिस्सों को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। इसी कारण कई बार सैनिक गश्त के दौरान दोनों पक्षों के जवान आमने-सामने आ जाते हैं।भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश की स्थिति को लेकर चीन के दावों से भारतीय संप्रभुता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
गलवान संघर्ष के बाद संबंधों में सुधार की कोशिश
जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था।इसके बाद सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत और राजनयिक प्रयास किए गए। अक्टूबर 2024 में कुछ विवादित क्षेत्रों में गश्त और सैनिकों की वापसी से संबंधित समझ बनने के बाद संबंधों को स्थिर करने की दिशा में प्रगति हुई।हालांकि, अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरें बताती हैं कि सीमा प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
शांति बनाए रखने पर दोनों देशों की नजर
भारत और चीन के बीच सीमा पर शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। दोनों देश सीमा संबंधी मतभेदों को सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत करते रहे हैं।चीन ने ताजा प्रतिक्रिया में समझौतों के पालन का दावा किया है, जबकि भारत ने स्थापित गश्ती व्यवस्थाओं का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।अब सीमा पर स्थिरता बनाए रखने और भविष्य में टकराव जैसी परिस्थितियों को रोकने के लिए दोनों देशों के बीच संवाद की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
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