यरुशलम : इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव के बाद राजनीतिक हलचल तेज है। चुनाव में विदेशी देशों द्वारा मतदाताओं को प्रभावित करने के कथित प्रयासों की जांच पहले से चल रही थी। अब इस मामले में मोसाद के सहयोग की खबर सामने आने के बाद विवाद ने और गंभीर रूप ले लिया है। इजरायली मीडिया के अनुसार, शिन बेट ने मोसाद से जांच में मदद मांगी है। मोसाद मुख्य रूप से उन पहलुओं की पड़ताल करेगी, जिनमें विदेशी सरकारों या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की संभावित भूमिका हो सकती है।
कतर और तुर्की की संभावित भूमिका की जांच
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या विदेशी स्रोतों से धन भेजकर इजरायल के चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स में कतर और तुर्की के नाम सामने आए हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी देश की संलिप्तता स्थापित नहीं हुई है। कतर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे इजरायल के आंतरिक राजनीतिक विवाद में घसीटने की कोशिश की जा रही है। वहीं, तुर्की ने भी चुनाव में किसी तरह के हस्तक्षेप से इनकार किया है।
शिन बेट की जांच में मोसाद क्यों शामिल?
शिन बेट इजरायल की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख एजेंसी है, जबकि मोसाद विदेशी खुफिया गतिविधियों पर काम करती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच में मोसाद का सहयोग इसलिए लिया जा रहा है, ताकि कथित विदेशी वित्तीय सहायता और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पड़ताल की जा सके। जांच का मुख्य केंद्र चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के कथित प्रयास हैं। फिलहाल मतगणना में हेरफेर या व्यापक चुनावी धांधली का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
चुनाव आयोग ने नतीजों को लेकर क्या कहा?
इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने स्पष्ट किया है कि विदेशी हस्तक्षेप से जुड़ी जांच सीमित दायरे में हो रही है। आयोग के अनुसार, जांच के कारण चुनावी नतीजों की वैधता पर सवाल नहीं उठता। शिन बेट ने भी कहा है कि जांच का उद्देश्य किसी पूरे समुदाय या वैध तरीके से मतदान करने वाले मतदाताओं पर आरोप लगाना नहीं है। केवल संभावित गैरकानूनी गतिविधियों की जांच की जा रही है।
चुनाव नतीजों के बाद बढ़ी राजनीतिक खींचतान
इजरायल में हुए चुनाव के बाद किसी भी प्रमुख राजनीतिक खेमे को संसद में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खेमे और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान जारी है। इसी बीच विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों ने चुनाव के बाद की राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि, चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के दावों और विदेशी दखल के आरोपों के संबंध में जांच एजेंसियों के अंतिम निष्कर्ष आना अभी बाकी है। इजरायल चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप की जांच जारी है, लेकिन फिलहाल कतर या तुर्की की संलिप्तता साबित नहीं हुई है। चुनाव आयोग ने भी संकेत दिया है कि जांच से चुनाव परिणाम प्रभावित नहीं होंगे।
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