नई दिल्ली। चीन के शिनजियांग क्षेत्र, जिसे उइघुर अधिकार संगठन पूर्वी तुर्किस्तान कहते हैं, में उइघुर समुदाय के मानवाधिकारों को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए गए हैं। वर्ल्ड उइघुर कांग्रेस (WUC) ने अपने साप्ताहिक संक्षिप्त विवरण में उइघुर समुदाय की स्थिति और विदेशों में रह रहे उइघुर कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।पोलिश प्रसारक टीवीपी वर्ल्ड के साथ एक साक्षात्कार में वर्ल्ड उइघुर डेमोक्रेटिक मूवमेंट (UZDM) के अध्यक्ष डोलकुन ईसा ने उइघुर समुदाय के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने चीन में मानवाधिकारों की स्थिति, अपने व्यक्तिगत अनुभवों और लंबे समय से चलाए जा रहे अधिकार अभियान के प्रभावों के बारे में जानकारी दी।
उइघुर समुदाय की स्थिति पर जताई चिंता
डोलकुन ईसा ने साक्षात्कार के दौरान पूर्वी तुर्किस्तान में उइघुर लोगों के साथ होने वाले कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि समुदाय की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।ईसा ने अपने लंबे अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि उइघुर अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाना भी जरूरी है।
विदेशों में रह रहे शरणार्थियों की मुश्किलों का जिक्र
डोलकुन ईसा ने उन उइघुर शरणार्थियों की स्थिति पर भी ध्यान दिलाया, जो सुरक्षा की तलाश में चीन से बाहर दूसरे देशों में रह रहे हैं।उनके अनुसार, विदेशों में शरण लेने के बाद भी कई उइघुर लोगों को सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि चीन से जुड़े डराने-धमकाने और परेशान करने के प्रयास दूसरे देशों तक फैले हुए हैं।ईसा ने कहा कि शरणार्थियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित देशों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि वे ऐसे लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लें और आवश्यक सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराएं।
जर्मनी जैसे देशों में भी सुरक्षा की चिंता
डोलकुन ईसा ने जर्मनी का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देशों में रहने वाले उइघुर कार्यकर्ता भी खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि चीन की सीमाओं के बाहर भी उइघुर समुदाय के लोगों को डराने और परेशान करने की घटनाएं सामने आती हैं। उनके अनुसार, ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य विदेशों में रहकर मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों पर दबाव बनाना है।इस प्रकार की गतिविधियों को सीमा पार दमन कहा जाता है। इसमें किसी देश की सरकार या उससे जुड़े तत्वों पर दूसरे देशों में रह रहे आलोचकों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के आरोप लगते हैं।
यूरोपीय सरकारों से सुरक्षा बढ़ाने की अपील
ईसा ने यूरोपीय देशों और अन्य सरकारों से आग्रह किया कि वे खतरे का सामना कर रहे उइघुर शरणार्थियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा मजबूत करें।उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल चिंता जताने के बजाय जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।ईसा के अनुसार, जिन लोगों ने सुरक्षा के लिए दूसरे देशों में शरण ली है, उन्हें वहां बिना डर के रहने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का अवसर मिलना चाहिए।उन्होंने इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की।
मानवाधिकारों के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान देने की मांग
वर्ल्ड उइघुर कांग्रेस ने 23 अक्टूबर को जारी अपने साप्ताहिक विवरण में उइघुर समुदाय से संबंधित अन्य मानवाधिकार चिंताओं का भी उल्लेख किया।संगठन ने एक विश्लेषण का हवाला देते हुए हिरासत, निगरानी, कथित जबरन श्रम और सांस्कृतिक पहचान पर दबाव जैसे मुद्दों को उठाया। रिपोर्ट में इन समस्याओं के अंतरराष्ट्रीय प्रभावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। उइघुर अधिकार संगठनों का कहना है कि इस मुद्दे को केवल चीन का आंतरिक मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, चीन की सरकार शिनजियांग में व्यवस्थित दमन और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को खारिज करती रही है। बीजिंग का कहना है कि उसकी नीतियां आतंकवाद और धार्मिक उग्रवाद से निपटने के उद्देश्य से बनाई गई हैं।
शरणार्थियों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर जोर
डोलकुन ईसा के साक्षात्कार और वर्ल्ड उइघुर कांग्रेस के साप्ताहिक विवरण ने एक बार फिर विदेशों में रह रहे उइघुर समुदाय की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह मानवाधिकारों से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से ले और सीमा पार उत्पीड़न के आरोपों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए।फिलहाल, डोलकुन ईसा ने विशेष रूप से यूरोपीय सरकारों से जोखिम का सामना कर रहे लोगों के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की मांग की है।
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