काठमांडू। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्नब का असर अब नेपाल के मौसम पर भी दिखाई दे रहा है। चक्रवात के कमजोर होकर निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलने के बावजूद नेपाल के कई हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी दर्ज की गई है। राजधानी काठमांडू सहित विभिन्न इलाकों में आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और तापमान में गिरावट महसूस की जा रही है। नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को देश के कई प्रांतों में बारिश, गरज-चमक और बर्फबारी की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित चक्रवात अर्नब और पश्चिमी हवाओं के आंशिक प्रभाव के कारण नेपाल में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। गुरुवार से देश के कई क्षेत्रों में बादल छाने और हल्की बारिश का सिलसिला शुरू हुआ। शुक्रवार को कोशी, मधेश, बागमती और गंडकी प्रांतों में कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। वहीं लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रांतों में भी कुछ स्थानों पर वर्षा हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि चक्रवात अर्नब भारत के तटीय क्षेत्रों से गुजरने के बाद धीरे-धीरे कमजोर हो गया। हालांकि, इसके साथ मौजूद नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियों ने नेपाल में बारिश और बर्फबारी के लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर दी। मौसम विभाग के वैज्ञानिक डेविड ढकाल के अनुसार, शनिवार दोपहर यानी 31 अक्टूबर से चक्रवात का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। इसके बावजूद लोगों को अपने क्षेत्र के मौसम पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
नेपाल के पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का प्रभाव अधिक महसूस किया जा रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के कारण ठंड बढ़ गई है, जबकि निचले पहाड़ी क्षेत्रों और तराई में वर्षा का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी, बर्फीले तूफान और हिमस्खलन जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
राजधानी काठमांडू में गुरुवार रात से बारिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। शुक्रवार सुबह भी कई इलाकों में बारिश जारी रही। कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, दैनिक मजदूरी करने वाले लोग और अन्य नागरिक छाते तथा रेनकोट का इस्तेमाल करते दिखाई दिए। लगातार बादल और बारिश के कारण मौसम ठंडा हो गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश की गतिविधियों के साथ तापमान में और गिरावट संभव है।
मौसम विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार सुबह तक पिछले 24 घंटों में काभ्रेपलांचोक जिले के रोशी मौसम केंद्र पर 50.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह संबंधित अवधि में दर्ज प्रमुख वर्षा आंकड़ों में सबसे अधिक था। कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रांतों के कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं कर्णाली और सुदूरपश्चिम के कुछ क्षेत्रों में भी वर्षा हुई।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने खराब मौसम को देखते हुए 29 से 31 अक्टूबर तक विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश से संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क अवरोध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी सावधान रहने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण करने वाले पर्यटकों के लिए मौसम संबंधी चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन ने पर्यटकों से ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा फिलहाल टालने का आग्रह किया है। जो यात्री पहले से पर्वतीय क्षेत्रों में मौजूद हैं, उन्हें मौसम सामान्य होने तक सुरक्षित स्थानों पर रुकने की सलाह दी गई है। भारी बर्फबारी की स्थिति में पर्वतीय रास्तों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
चक्रवात अर्नब के कारण उत्पन्न मौसम की परिस्थितियों ने नेपाल के कृषि क्षेत्र की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। इस समय कई इलाकों में धान की फसल कटाई के लिए तैयार है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग ने किसानों से शुक्रवार और शनिवार को धान की कटाई जैसे कृषि कार्यों को टालने का आग्रह किया है, ताकि अचानक बारिश से फसल को होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कटाई के समय अधिक बारिश होने से धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। खेतों में पानी भरने और कटी हुई फसल भीगने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन मौसम साफ होने के बाद ही किया जा सकेगा।
नेपाल के मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार रात भी देश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहने की संभावना है। कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रांतों सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। कुछ हिमालयी क्षेत्रों में मध्यम से भारी बर्फबारी की संभावना भी बनी हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि शनिवार दोपहर से मौसम प्रणाली धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगी। हालांकि, इससे पहले कुछ इलाकों में तेज बारिश और बर्फबारी की आशंका बनी रहेगी। प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक मौसम सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।
चक्रवात अर्नब का प्रत्यक्ष प्रभाव नेपाल में भारत के तटीय क्षेत्रों की तुलना में कम रहा है, लेकिन इसके अवशेषों से पैदा हुई बारिश और बर्फबारी ने देश के कई हिस्सों में मौसम बदल दिया है। फिलहाल मौसम विभाग स्थिति की निगरानी कर रहा है। लोगों को विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों, भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों और पर्वतीय मार्गों पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
Tags: