मॉस्को/कीव : 30 अक्टूबर 2026। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन ने करीब दो सप्ताह के अंतराल के बाद रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना फिर शुरू कर दिया है। शुक्रवार तड़के रूस के समारा क्षेत्र में स्थित नोवोकुइबिशेव्स्क तेल रिफाइनरी पर संदिग्ध यूक्रेनी ड्रोन हमला हुआ। हमले के बाद रिफाइनरी परिसर में आग लगने की खबर सामने आई है। स्थानीय निवासियों ने इलाके में धमाकों की आवाजें सुनने और आसमान में ड्रोन दिखाई देने की जानकारी दी है। हालांकि, हमले से हुए वास्तविक नुकसान और उत्पादन पर इसके असर की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, 30 अक्टूबर की सुबह समारा क्षेत्र के नोवोकुइबिशेव्स्क शहर में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। रूसी स्वतंत्र मीडिया संस्थान ASTRA और यूक्रेनी निगरानी चैनल Exilenova+ ने घटनास्थल से संबंधित तस्वीरें और वीडियो प्रकाशित किए हैं। इन तस्वीरों में तेल रिफाइनरी के आसपास आग और धुएं का गुबार दिखाई देने का दावा किया गया है।स्थानीय लोगों के अनुसार, रात से ही क्षेत्र में ड्रोन की गतिविधियां देखी जा रही थीं। रूसी अधिकारियों ने सुबह करीब छह बजे ड्रोन हमले की चेतावनी जारी की। इस दौरान समारा हवाई अड्डे पर उड़ान संचालन भी प्रभावित हुआ। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए सभी वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रूस की महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी पर हमला
नोवोकुइबिशेव्स्क तेल रिफाइनरी रूस की प्रमुख ऊर्जा सुविधाओं में शामिल है। यह रिफाइनरी रूसी सरकारी नियंत्रण वाली तेल कंपनी रोसनेफ्ट के अंतर्गत संचालित होती है। इसकी वार्षिक कच्चा तेल प्रसंस्करण क्षमता लगभग 88 लाख मीट्रिक टन बताई जाती है।इस संयंत्र में पेट्रोल, डीजल, बिटुमेन, लुब्रिकेंट और विमान ईंधन सहित कई पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यहां निर्मित विमान ईंधन का इस्तेमाल रूसी सैन्य विमानन में भी होता है। यही कारण है कि यह रिफाइनरी यूक्रेन की ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने वाली रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।इससे पहले भी नोवोकुइबिशेव्स्क रिफाइनरी यूक्रेनी ड्रोन हमलों का निशाना बन चुकी है। अगस्त 2026 में इसी संयंत्र पर हमले के बाद आग लगने की खबरें सामने आई थीं। इसके अतिरिक्त अप्रैल में हुए हमलों के बाद रिफाइनरी की कुछ प्रमुख उत्पादन इकाइयों का संचालन प्रभावित हुआ था।
दो सप्ताह का अनौपचारिक ठहराव खत्म होने के संकेत
ताजा हमले को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अक्टूबर के मध्य से यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों को कथित तौर पर अस्थायी रूप से रोक रखा था।अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से दबाव बढ़ने के बाद यूक्रेनी सैन्य इकाइयों ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर लंबी दूरी के हमले रोक दिए थे।रिपोर्ट में दावा किया गया कि यूक्रेन की उन सैन्य इकाइयों को अक्टूबर के मध्य में अभियान स्थगित करने के निर्देश दिए गए थे, जो रूस के भीतर दूर तक ड्रोन हमले करती हैं। हालांकि, यूक्रेन ने आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी स्थायी प्रतिबंध की घोषणा नहीं की थी।यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी संकेत दिया था कि रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमला नहीं करने का कोई स्थायी आदेश लागू नहीं है। ऐसे में समारा की रिफाइनरी पर हुआ ताजा हमला यूक्रेन की रणनीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन के दबाव के बीच नई कार्रवाई
यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों का मुद्दा अमेरिका और यूक्रेन के संबंधों में भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को सीमित करने और युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन चाहता था कि रूस की तेल आपूर्ति से संबंधित ठिकानों पर हमले कम किए जाएं, ताकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करने में मदद मिल सके।दूसरी ओर यूक्रेन का तर्क रहा है कि रूस की तेल और ऊर्जा सुविधाएं उसकी युद्ध संबंधी आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूस की तेल आय को प्रभावित करने से उसकी सैन्य गतिविधियों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है।दोनों देशों के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का मुद्दा युद्धविराम संबंधी प्रयासों के दौरान भी चर्चा में रहा है। हालांकि, किसी व्यापक और स्थायी समझौते पर सहमति नहीं बन सकी है।
रूसी तेल उत्पादन पर पड़ सकता है असर
लगातार ड्रोन हमलों से रूस के पेट्रोलियम उद्योग पर दबाव बढ़ा है। पिछले कई महीनों में यूक्रेन ने विभिन्न रूसी रिफाइनरियों, ईंधन भंडारण केंद्रों और तेल परिवहन सुविधाओं को निशाना बनाया है।रॉयटर्स की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, हमलों में आई अस्थायी कमी के बाद अक्टूबर के दूसरे हिस्से में रूस की रिफाइनरियों ने कच्चे तेल का प्रसंस्करण बढ़ाया था। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान तेल प्रसंस्करण में महीने की शुरुआत की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि हुई थी।लेकिन समारा क्षेत्र में सामने आए नए हमले के बाद ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर बढ़ सकती हैं। यदि हमले के कारण रिफाइनरी की महत्वपूर्ण उत्पादन इकाइयों को नुकसान हुआ है, तो वहां ईंधन उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, अभी उत्पादन बंद होने या बड़े आर्थिक नुकसान का कोई पुष्ट आकलन उपलब्ध नहीं है।
अन्य रूसी क्षेत्रों में भी ड्रोन गतिविधियां
समारा के अलावा रूस के अन्य इलाकों में भी ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। मॉस्को और उसके आसपास के क्षेत्रों में रूसी वायु रक्षा प्रणाली की गतिविधियों की जानकारी दी गई है।कुछ हवाई अड्डों पर सुरक्षा कारणों से अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए। रूसी अधिकारियों ने कई ड्रोन नष्ट करने के दावे किए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।लगातार ड्रोन गतिविधियों से स्पष्ट होता है कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष केवल अग्रिम मोर्चों तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक ढांचे भी युद्ध के व्यापक प्रभाव का सामना कर रहे हैं।
हमले के बाद आगे क्या?
समारा की नोवोकुइबिशेव्स्क तेल रिफाइनरी पर कथित यूक्रेनी हमले के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल संयंत्र को हुए नुकसान और आगामी दिनों में यूक्रेन की सैन्य रणनीति को लेकर है।यदि यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों का अभियान दोबारा तेज करता है, तो इससे ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, रूस की घरेलू ईंधन आपूर्ति और दोनों देशों के बीच संभावित शांति वार्ता पर असर पड़ सकता है।फिलहाल हमले में किसी के हताहत होने, उत्पादन इकाइयों को पहुंचे नुकसान और संयंत्र में परिचालन की स्थिति के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा है। इस बीच करीब दो सप्ताह के ठहराव के बाद सामने आई इस घटना ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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