उत्तर प्रदेश: आम उत्पादकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अमरोहा जिले से पहली बार समुद्री रास्ते के जरिए प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आमों की बड़ी खेप दुबई भेजी गई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, अमरोहा से करीब 12.5 टन आमों का सफल वाणिज्यिक निर्यात किया गया है। यह उत्तर प्रदेश से खाड़ी देश तक समुद्री मार्ग से भेजी गई पहली सफल कमर्शियल आम खेप है। इस पहल से किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है और भारतीय आमों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पकड़ मजबूत होगी।
इस समुद्री निर्यात को सफल बनाने में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (ICAR-CISH), लखनऊ और एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) ने अहम भूमिका निभाई। दोनों संस्थानों ने मिलकर ऐसा प्रोटोकॉल तैयार किया, जिससे आमों की गुणवत्ता बनाए रखते हुए उन्हें लंबे समुद्री सफर के बाद भी सुरक्षित रखा जा सके।
कृषि मंत्रालय ने बताया कि अमरोहा से भेजी गई इस खेप को कटाई से लेकर दुबई के बाजार तक पहुंचने में करीब 25 दिन लगे। इसके बावजूद आमों की गुणवत्ता में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई। मंत्रालय ने इसे भारतीय कृषि निर्यात के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
पहले भारतीय आमों का बड़ा हिस्सा हवाई मार्ग से विदेश भेजा जाता था, जिससे परिवहन लागत काफी अधिक होती थी। महंगे किराए के कारण किसानों और निर्यातकों को कई बार सीमित लाभ मिलता था। समुद्री मार्ग से निर्यात शुरू होने के बाद लागत कम होगी और अधिक मात्रा में आमों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा।
मंत्रालय के अनुसार, इस नई व्यवस्था से आम किसानों को पारंपरिक निर्यात की तुलना में लगभग 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक अतिरिक्त आय मिलने की संभावना है। इससे खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी और आम उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।
अमरोहा की शहनाज एक्सपोर्ट ने अताशी ग्लोबल के साथ मिलकर यह खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख रिटेल समूह लुलु ग्रुप को भेजी है। इस पूरी प्रक्रिया में ICAR-CISH ने तकनीकी सहायता दी, जबकि APEDA ने निर्यात संबंधी व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
जानकारी के मुताबिक, आमों की तुड़ाई 22 जून को की गई थी। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से उनकी छंटाई, पैकिंग और रखरखाव किया गया ताकि समुद्री यात्रा के दौरान फलों की गुणवत्ता बरकरार रहे। विशेषज्ञों ने विशेष तकनीकों का इस्तेमाल कर आमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया।
यह सफलता ऐसे समय में आई है जब भारत अपने कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। समुद्री मार्ग से आम निर्यात की यह पहल उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य आम उत्पादक राज्यों के लिए भी नए अवसर खोल सकती है।
दशहरी और लंगड़ा जैसे भारतीय आमों की विदेशों में पहले से काफी मांग है। अब कम लागत वाले समुद्री परिवहन विकल्प मिलने से खाड़ी देशों के अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भारतीय आमों की पहुंच बढ़ सकती है।
कृषि मंत्रालय को उम्मीद है कि आने वाले समय में अधिक निर्यातक समुद्री रास्ते को अपनाएंगे। इससे लॉजिस्टिक्स खर्च कम होगा, किसानों की आय बढ़ेगी और भारत के आम निर्यात को नई गति मिलेगी। यह कदम उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों के लिए आर्थिक मजबूती का एक नया रास्ता साबित हो सकता है।