टोल प्लाजा पर डिजिटल क्रांति, FASTag से 63 करोड़ भुगतान

Update: 2026-07-22 16:34 GMT

नई दिल्ली। देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन व्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि जून 2026 तक देशभर में 77 लाख से अधिक वार्षिक FASTag पास जारी किए जा चुके हैं। इन पासों के जरिए नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर 63 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन दर्ज किए गए हैं।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि FASTag आधारित टोल व्यवस्था ने देश में यात्रा को अधिक सुविधाजनक और तेज बनाया है। उन्होंने कहा कि वार्षिक FASTag पास योजना से वाहन चालकों को बार-बार टोल भुगतान की प्रक्रिया से राहत मिली है और टोल संचालन में भी पारदर्शिता बढ़ी है।

मंत्री ने बताया कि कार, जीप और वैन श्रेणी के वाहनों द्वारा किए जाने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) लेनदेन में वार्षिक FASTag पास की हिस्सेदारी करीब 33 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में वाहन चालक अब सामान्य टोल भुगतान की जगह वार्षिक पास सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सरकार के अनुसार, नेशनल हाईवे पर होने वाले कुल टोल शुल्क संग्रह का करीब 98 प्रतिशत हिस्सा अब FASTag के माध्यम से किया जा रहा है। इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आई है और वाहन चालकों का समय भी बच रहा है।

FASTag व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए एक मजबूत डिजिटल नेटवर्क तैयार किया गया है। सरकार ने बताया कि सभी FASTag लेनदेन टोल मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर, टोल प्लाजा के अक्वायरर बैंक, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और FASTag जारी करने वाले बैंक के माध्यम से पूरे किए जाते हैं।

इस डिजिटल प्रक्रिया के तहत जैसे ही वाहन का टोल भुगतान कटता है, उसकी जानकारी तुरंत वाहन मालिक को मिल जाती है। साथ ही प्रत्येक लेनदेन का रिकॉर्ड केंद्रीय डेटाबेस में सुरक्षित रखा जाता है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था में बिना अधिकृत बैंकिंग नेटवर्क के कोई भी FASTag ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो सकता, जिससे धोखाधड़ी की संभावना कम होती है।

टोल शुल्क से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए भी सरकार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कई व्यवस्थाएं विकसित की हैं। वाहन चालक टोल भुगतान, गलत कटौती या अन्य समस्याओं से संबंधित शिकायतों का समाधान इन माध्यमों के जरिए करा सकते हैं।

केंद्र सरकार अब टोल व्यवस्था को और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एनालिटिक्स और RFID तकनीक पर आधारित मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोल सिस्टम लागू करने की योजना बनाई गई है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने या किसी विशेष लेन में इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। वाहन की पहचान ऑटोमैटिक नंबर प्लेट सिस्टम और अन्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से होगी और टोल शुल्क सीधे वाहन मालिक के खाते से कट जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस आधुनिक तकनीक से हाईवे पर वाहनों की गति बढ़ेगी, ईंधन की बचत होगी और टोल संचालन अधिक प्रभावी बनेगा। FASTag के बढ़ते इस्तेमाल को देश में डिजिटल भुगतान और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

77 लाख से अधिक वार्षिक पास और 63 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन का आंकड़ा यह दर्शाता है कि देश में वाहन चालक तेजी से डिजिटल टोल व्यवस्था को अपना रहे हैं। आने वाले समय में AI और ऑटोमैटिक तकनीक के इस्तेमाल से हाईवे यात्रा को और आसान और तेज बनाने की तैयारी है।

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