Mumbai मुंबई : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। बाजार में चौतरफा बिकवाली के चलते प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बुधवार को कारोबार समाप्त होने के समय बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,755.05 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 इंडेक्स भी 191.45 अंक यानी 0.79 प्रतिशत टूटकर 23,996.25 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की सतर्कता के कारण घरेलू बाजार में भी दबाव देखने को मिला।
बुधवार के कारोबार में निफ्टी-50 इंडेक्स के कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इंडिगो, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफोसिस, एक्सिस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), मैक्स हेल्थ और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।
दूसरी ओर, कुछ कंपनियों के शेयरों ने बाजार में गिरावट के बीच बेहतर प्रदर्शन किया। बजाज ऑटो, नेस्ले इंडिया, टाटा कंज्यूमर और इटरनल के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। हालांकि, इन कंपनियों में तेजी भी बाजार की गिरावट को रोकने में कामयाब नहीं हो सकी।
शेयर बाजार में बुधवार को निवेशकों ने खासतौर पर बैंकिंग, आईटी, हेल्थकेयर और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में सावधानी बरती। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाई और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो इसका असर भारतीय बाजार पर आगे भी देखने को मिल सकता है।
बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ी है, हालांकि जानकारों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार और घरेलू मांग के चलते लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। फिलहाल बाजार की नजर वैश्विक संकेतों और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है।