Old tax बकाया है तो रुक सकता है रिफंड? समझें नियम

Update: 2026-07-09 11:11 GMT

New Delhi नई दिल्ली :  अगर आपको आयकर विभाग की ओर से आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 245 के तहत कोई इंटिमेशन मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इस सूचना का मतलब यह नहीं होता कि आपने कोई गलती की है या आपके खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू हो गई है। दरअसल, यह एक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत आयकर विभाग आपके पुराने बकाया टैक्स को मौजूदा टैक्स रिफंड से समायोजित करने की जानकारी देता है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) संतोष मिश्रा के अनुसार, धारा 245 की सूचना का उद्देश्य करदाता को यह बताना होता है कि विभाग पिछले किसी वित्तीय वर्ष के बकाया टैक्स को वर्तमान वर्ष में मिलने वाले रिफंड से काटने का प्रस्ताव कर रहा है। विभाग ऐसा करने से पहले करदाता को अपनी बात रखने का मौका देता है।

क्या है आयकर अधिनियम की धारा 245?

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 245 के तहत अगर किसी व्यक्ति का टैक्स रिफंड बनता है और उसी व्यक्ति के नाम पर किसी पुराने आकलन वर्ष का टैक्स बकाया है, तो आयकर विभाग उस बकाया राशि को रिफंड से समायोजित कर सकता है।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति को मौजूदा वर्ष में 50 हजार रुपये का टैक्स रिफंड मिलना है, लेकिन पिछले साल का 20 हजार रुपये टैक्स बकाया है, तो विभाग नियमों के अनुसार रिफंड में से 20 हजार रुपये समायोजित कर सकता है।

नोटिस क्यों जारी किया जाता है?

धारा 245 के तहत सूचना तब भेजी जाती है, जब विभाग के रिकॉर्ड में यह दिखाई देता है कि करदाता के ऊपर पुराने साल का टैक्स बकाया है और वर्तमान वर्ष में उसे रिफंड मिलने वाला है।

इसका उद्देश्य करदाता को पहले से जानकारी देना होता है, ताकि वह किसी तरह की आपत्ति होने पर विभाग को अपनी स्थिति बता सके।

नोटिस मिलने पर क्या करें?

अगर आपको धारा 245 की सूचना मिलती है तो सबसे पहले इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर नोटिस की जानकारी जांचें। देखें कि बकाया टैक्स किस वर्ष का है और विभाग ने किस आधार पर यह मांग दिखाई है।

अगर आपको लगता है कि टैक्स की मांग गलत है, टैक्स पहले ही जमा किया जा चुका है या किसी अन्य कारण से यह बकाया सही नहीं है, तो आप विभाग के सामने अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

करदाता को निर्धारित समय सीमा के अंदर जवाब देना चाहिए। अगर समय पर जवाब नहीं दिया जाता है तो विभाग उपलब्ध जानकारी के आधार पर रिफंड को समायोजित कर सकता है।

जवाब देते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • नोटिस की जानकारी को ध्यान से पढ़ें।

  • पुराने टैक्स बकाया की जांच करें।

  • भुगतान किए गए टैक्स के प्रमाण सुरक्षित रखें।

  • जरूरत पड़ने पर चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स विशेषज्ञ की सलाह लें।

  • समय सीमा के अंदर ऑनलाइन जवाब दाखिल करें।

करदाताओं के लिए जरूरी सलाह

सीए संतोष मिश्रा के मुताबिक, धारा 245 का नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि आयकर विभाग ने करदाता को दोषी मान लिया है। यह केवल टैक्स समायोजन की प्रक्रिया से जुड़ी सूचना होती है।

उन्होंने कहा कि करदाताओं को ऐसे नोटिस को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर जांच कर जवाब देने से किसी भी परेशानी से बचा जा सकता है।

आयकर विभाग की यह प्रक्रिया पुराने टैक्स बकाये की वसूली और टैक्स रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने के लिए अपनाई जाती है। इसलिए धारा 245 की सूचना मिलने पर घबराने के बजाय सही जानकारी जुटाकर उचित कदम उठाना बेहतर होता है।

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