CG BREAKING: SDOP निकिता तिवारी की जांच से 7 दोषियों को मिली 3-3 साल की सजा
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Pendra. पेंड्रा। छत्तीसगढ़ के पेंड्रा थाना क्षेत्र में पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड के माध्यम से संचालित किए जा रहे ऑनलाइन सट्टा गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी पहचान दस्तावेजों के आधार पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी करवाकर उन्हें ऑनलाइन सट्टा कारोबार से जुड़े लोगों तक पहुंचाते थे। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल अवैध सट्टा संचालन और वित्तीय लेन-देन के लिए किया जा रहा था। इस मामले में थाना पेंड्रा में अपराध क्रमांक 157/2024 दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 06, 07, 08, भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी, 465, 467, 468, 471 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी और 66डी के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार, 14 मई 2024 को ऑनलाइन सट्टा कारोबार की सूचना मिलने के बाद छापेमारी की गई थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़ किया। जांच में पता चला कि गिरोह फर्जी सिम कार्ड और बैंक खातों के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे का अवैध कारोबार संचालित कर रहा था। इस पूरे मामलें की जांच करने वाली SDOP निकिता तिवारी की अहम् भूमिका रही है।
पुलिस जांच में मुख्य आरोपी योगेश देवांगन की भूमिका सामने आई। आरोपी ने पीओएस संचालक के तौर पर फर्जी नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी किए थे। इन सिम कार्डों को बाद में ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले लोगों तक पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार, इन फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल पहचान छिपाने और अवैध गतिविधियों को संचालित करने के लिए किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि योगेश देवांगन द्वारा तैयार किए गए फर्जी सिम कार्डों को विनायक ताम्रकार के माध्यम से सट्टा संचालकों और अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाता था। इसके अलावा गिरोह में शामिल कुछ लोगों द्वारा म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराए गए थे, जिनका उपयोग ऑनलाइन सट्टे से जुड़े पैसों के लेन-देन में किया गया। पुलिस के अनुसार, अजय यादव, जितेंद्र सोनवानी, राज कुमार, राहुल कोरी और अनुराग सोनी द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों का इस्तेमाल सट्टे की रकम के लेन-देन के लिए किया गया। इन खातों के जरिए अवैध रूप से प्राप्त राशि को इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था। जांच में ऑनलाइन सट्टा संचालन करने वाले मुख्य आरोपियों की भी पहचान हुई। रितेश सुल्तानिया उर्फ गुनगुन और मधुर जैन द्वारा "राजा रानी बुक ग्रुप" के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा चलाया जा रहा था।
इस गिरोह में प्रकाश केंवट और हर्ष जायसवाल एजेंट के रूप में काम कर रहे थे, जो ग्राहकों से संपर्क कर सट्टा लगवाने का काम करते थे। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए सभी 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया। आरोपियों को न्यायालय से रिमांड पर लिया गया। मुख्य आरोपी योगेश देवांगन के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी सिम कार्ड, लापू सिम, स्कैनिंग डिवाइस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई। पुलिस ने योगेश देवांगन के बयान और मेमोरेंडम कथन के आधार पर उन लोगों तक भी पहुंच बनाई, जिन्हें फर्जी सिम कार्ड बेचे गए थे। इसके बाद संबंधित आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। जांच के दौरान ऑनलाइन सट्टा गिरोह के संचालकों और एजेंटों को भी साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मामले में सभी आवश्यक साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में चालान प्रस्तुत कर दिया है। वर्तमान में यह मामला ट्रायल के अंतिम चरण में है। पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन सट्टा और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पेंड्रा पुलिस की इस कार्रवाई से ऑनलाइन सट्टा कारोबार और फर्जी दस्तावेजों के जरिए चल रहे नेटवर्क पर बड़ा प्रहार हुआ है। पुलिस अब भी ऐसे अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है, जो इस तरह की अवैध गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल या ऑनलाइन सट्टे जैसी गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।