मानसून के बीच स्वास्थ्य संकट, झारखंड में हजारों लोग मलेरिया की चपेट में, डेंगू को लेकर अलर्ट
मलेरिया-डेंगू का बढ़ा खतरा
Jharkhand: मानसून के साथ ही मलेरिया और डेंगू जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले छह महीनों में 16,738 लोग मलेरिया की चपेट में आ चुके हैं। वहीं, डेंगू के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसमें रांची जिला सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है।
बारिश के मौसम में जगह-जगह जलभराव, गंदगी और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है।
छह महीने में मिले 16 हजार से ज्यादा मलेरिया मरीज
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनवरी से अब तक राज्य में हजारों लोगों की जांच की गई, जिसमें बड़ी संख्या में मलेरिया के मरीज सामने आए हैं। बारिश बढ़ने के साथ ही मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है।
ग्रामीण इलाकों में मलेरिया के मामले अधिक सामने आने की संभावना रहती है, क्योंकि कई क्षेत्रों में जल निकासी और स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती बनी रहती है।
रांची में डेंगू का सबसे ज्यादा असर
राजधानी रांची में डेंगू के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। यहां सबसे अधिक मरीज मिलने के कारण प्रशासन ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है।
नगर निकायों की ओर से मच्छर नियंत्रण के लिए फॉगिंग, साफ-सफाई और जलभराव वाले स्थानों की पहचान जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
बारिश के बाद बढ़ता है मच्छरों का खतरा
बारिश के बाद घरों के आसपास जमा पानी, खुले टैंक, गमले, टायर और अन्य जगहों पर पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ पानी में भी पनप सकता है, इसलिए घर और आसपास के क्षेत्रों में सफाई रखना जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि—
घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
पूरी बांह के कपड़े पहनें।
बुखार आने पर तुरंत जांच कराएं।
बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें।
अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश
बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध मरीजों की जांच, उपचार और निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि समय पर पहचान और इलाज से मलेरिया और डेंगू के गंभीर प्रभावों से बचा जा सकता है।
लोगों की जागरूकता जरूरी
बारिश के मौसम में मच्छरजनित बीमारियों को रोकने के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। घरों और आसपास स्वच्छता बनाए रखने से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।