अयोध्या : शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष और कथित सनातन विरोधी ताकतों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में सनातन समाज के पास बल, बुद्धि और वैभव सबकुछ था, लेकिन भाषा एवं जाति के आधार पर विभाजित होने के कारण उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देश के विभाजन, अयोध्या के विकास, संभल हिंसा, राम जन्मभूमि आंदोलन और पाकिस्तान व बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज को इतिहास की घटनाओं से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1947 में भारत के विभाजन के दौरान केवल हिंदू और सिख समुदाय के लोग ही प्रभावित नहीं हुए, बल्कि भारत का भी विभाजन हुआ। उनके मुताबिक भारत आदिकाल से सनातन राष्ट्र के रूप में एक इकाई रहा है, लेकिन सामाजिक विभाजन और तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण देश को विभाजन की त्रासदी झेलनी पड़ी।
संभल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 1526 में वहां हरिहर मंदिर को तोड़कर एक ढांचा खड़ा किया गया था। उन्होंने कहा कि अगर उस समय इसका एकजुट होकर प्रतिकार किया गया होता तो वर्ष 1528 में अयोध्या में श्रीराम मंदिर को क्षतिग्रस्त करने और वहां ढांचा खड़ा करने का साहस कोई नहीं करता। उन्होंने कहा कि अब अयोध्या और संभल दोनों अपना प्राचीन वैभव वापस प्राप्त कर रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों की तुलना रामायण के पात्रों और कालनेमि से करते हुए लोगों को उनसे सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के राजतिलक के समय मंथरा और कैकई के कारण उन्हें वनवास मिला था। आज भी कुछ लोग उसी प्रकार की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं, केवल उनके चेहरे बदल गए हैं।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान रामभक्तों पर लाठी और गोलियां चलाने वाले तथा मंदिर आंदोलन का विरोध करने वाले लोग आज स्वयं को रामभक्त घोषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग रामभक्तों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं और समाज को इनकी पहचान करनी होगी।
अयोध्या में कथित चढ़ावा चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि प्रकरण सामने आते ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आग्रह पर विशेष जांच दल गठित किया गया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच और कार्रवाई की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए सरकार और ट्रस्ट दोनों प्रतिबद्ध हैं।
मुख्यमंत्री ने पूर्व की अयोध्या और वर्तमान विकास कार्यों की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि पहले अयोध्या बिजली के लिए तरसती थी और सरयू नदी के घाटों पर गंदगी रहती थी। श्रद्धालुओं को स्नान करने में परेशानी होती थी, लेकिन अब अयोध्या का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। धार्मिक स्थलों, घाटों, सड़कों और दूसरी सुविधाओं के विकास के कारण श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल रही है।
संभल हिंसा को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अदालत के आदेश पर विवादित स्थल का सर्वे शुरू होने के बाद उपद्रव हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा का निशाना पुलिसकर्मी और हिंदू थे। पुलिस की कार्रवाई के बाद हालात नियंत्रित हुए। उन्होंने यह भी कहा कि अब संभल में प्राचीन तीर्थ और कुंड दिखाई देने लगे हैं तथा क्षेत्र में विकास किया जा रहा है।
सीएम योगी ने दावा किया कि संभल में स्वतंत्रता के बाद लगातार सांप्रदायिक हिंसा होती रही। उन्होंने 1970 के दशक में हिंदुओं की हत्या और बाद में मुकदमे वापस लिए जाने का आरोप तत्कालीन सरकारों पर लगाया। मुख्यमंत्री के मुताबिक वर्तमान सरकार के कार्यकाल में वहां दंगे नहीं हो रहे हैं और सौहार्दपूर्ण वातावरण बना है।
मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचारों को लेकर विपक्ष की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत में होने वाली किसी घटना पर हंगामा करने वाले लोग पड़ोसी देशों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर कुछ नहीं बोलते। उन्होंने कहा कि आजादी के समय नरेंद्र मोदी या सरदार वल्लभभाई पटेल जैसा नेतृत्व होता तो विभाजन और बड़े पैमाने पर हिंसा को रोका जा सकता था।
योगी ने विपक्ष पर अनुच्छेद 370 हटाए जाने, नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ दल पहले भी समाज को भाषा और जाति के आधार पर बांटते थे और आज भी वही राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से एकजुट रहने और विभाजनकारी शक्तियों से सावधान रहने की अपील की।