अलीगढ़ : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के बरला कस्बे में निजी सुरक्षाकर्मी सुरेश कुमार की गोली मारकर हत्या करने के मामले में अदालत ने उनकी पत्नी बीना और उसके प्रेमी मनोज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय तोष कुमार शर्मा की अदालत ने साक्ष्यों और आठ गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों को दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने से मिलने वाली धनराशि मृतक के बच्चों को देने का आदेश दिया गया है।
इस मुकदमे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि बीना के 16 वर्षीय बेटे नीतेश ने अदालत में अपनी मां के खिलाफ गवाही दी। बेटे ने अदालत को बताया कि किस प्रकार उसके पिता की हत्या की योजना बनाई गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बच्चे की गवाही ने मामले की कड़ियों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। आरोप तय होने के करीब छह महीने में मुकदमे की सुनवाई पूरी कर अदालत ने फैसला सुनाया।
बरला कस्बे के मोहल्ला कोठी निवासी 36 वर्षीय सुरेश कुमार नोएडा में निजी सुरक्षाकर्मी के रूप में काम करते थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार उनकी पत्नी बीना के गांव निवासी मनोज से संबंध थे। मनोज का बीना के घर आना-जाना था। सुरेश इसका विरोध करते थे, जिसके कारण परिवार में अक्सर विवाद होता था। अदालत में पेश साक्ष्यों के मुताबिक बीना और मनोज ने सुरेश को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
दस जुलाई 2025 की सुबह सुरेश दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे थे। अभियोजन के अनुसार बीना ने उन्हें जाने से रोक दिया और बहाने से घर के बाहर बैठा दिया। सुरेश बाहर बैठकर मोबाइल फोन चला रहे थे, तभी मनोज वहां पहुंचा और तमंचे से उनके सीने में गोली मार दी। गोली लगने से सुरेश गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।
घटना के समय पास की परचून की दुकान पर मौजूद सुरेश के भाई विजय सिंह उन्हें बचाने दौड़े। आरोप है कि मनोज ने विजय पर भी गोली चलाई। गोली उनके कान के पास से निकलकर दीवार में जा लगी, जबकि छर्रे लगने से उनका चेहरा घायल हो गया। इसके बाद मनोज मौके से निकल गया और बाद में स्वयं थाने पहुंचकर हत्या करने की बात स्वीकार करते हुए गिरफ्तारी देने की बात कही।
विजय सिंह की शिकायत पर पुलिस ने बीना और मनोज के खिलाफ हत्या एवं जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। पांच फरवरी को अदालत में आरोप तय किए गए और अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाहों को पेश किया। मृतक के बेटे की गवाही के साथ प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य प्रमाण अदालत के सामने रखे गए।
मामले में शिकायतकर्ता विजय सिंह की भी मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। उन्होंने 12 फरवरी को अदालत में गवाही दी थी। परिवार का कहना है कि कुछ दिन बाद उन्हें बीना की जमानत होने की जानकारी मिली, जिससे वह सदमे में चले गए। 19 अप्रैल को गांव में उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि उनकी मौत के चिकित्सकीय कारण के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत में भावुक स्थिति बन गई। मृतक की नाबालिग बेटी रोशनी से अदालत ने उसकी राय पूछी तो उसने मां के लिए किसी प्रकार की रियायत नहीं देने की मांग की। उसने कहा कि पिता की हत्या में शामिल मां को कठोरतम दंड मिलना चाहिए। फैसला सुनने के बाद बीना रोने लगी, लेकिन उसके बच्चों ने उससे दूरी बनाए रखी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार हत्या से करीब एक महीने पहले मनोज ने तमंचे की व्यवस्था कर ली थी। यह हथियार कथित तौर पर बीना के पास रखा गया था और घटना से पहले उसने ही मनोज को सौंपा था। घटना की रात दोनों लगातार फोन पर संपर्क में थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गोली लगने के बाद भी बीना ने मनोज को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि सुरेश जीवित न बचे।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जेपी राजपूत ने कहा कि पति-पत्नी का संबंध विश्वास पर आधारित होता है, लेकिन इस मामले में उसी भरोसे को तोड़ा गया। अदालत ने दोनों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 35-35 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है।
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