उत्तर प्रदेश : सीतापुर जिले में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित एक सरकारी आवासीय विद्यालय से बाल यौन उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। विद्यालय के हॉस्टल में रहने वाले कक्षा छह के 11 वर्षीय छात्र ने कक्षा आठ में पढ़ने वाले पांच छात्रों पर उसके साथ जबरन गलत काम करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद बच्चा इतना डर गया कि उसने घर फोन कर पिता से उसे तत्काल विद्यालय से ले जाने की गुहार लगाई। पीड़ित के पिता ने पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल को शिकायती पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
संदना थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले परिवार ने अप्रैल 2026 में अपने 11 वर्षीय बेटे का दाखिला सदरपुर स्थित सरकारी आवासीय विद्यालय में कराया था। बच्चा 13 अप्रैल से विद्यालय के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि सरकारी आवासीय विद्यालय में उसे पढ़ाई के साथ सुरक्षित वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि, बच्चे की ओर से लगाए गए आरोपों ने विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवार के मुताबिक 11 अगस्त को बच्चे ने अचानक घर फोन किया। उसने घबराई हुई आवाज में पिता से कहा कि वह अब विद्यालय में नहीं रहना चाहता और उसे जल्द से जल्द वहां से ले जाया जाए। बेटे की आवाज में डर महसूस होने के बाद पिता अगले दिन यानी 12 अगस्त को विद्यालय पहुंचे। पिता को सामने देखते ही बच्चा रोने लगा और उसने अपने साथ हुई कथित घटना की जानकारी दी।
बच्चे ने आरोप लगाया कि कक्षा आठ में पढ़ने वाले पांच छात्रों ने हॉस्टल में उसके साथ जबरन गलत काम किया। बच्चे की बात सुनकर पिता के होश उड़ गए। परिवार का कहना है कि घटना के बाद से छात्र बेहद डरा हुआ है और उसकी मानसिक स्थिति भी प्रभावित हुई है। वह दोबारा विद्यालय जाने को तैयार नहीं है।
पीड़ित छात्र के पिता का आरोप है कि उन्होंने सबसे पहले विद्यालय प्रबंधन को मामले की सूचना दी और संबंधित छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। इसके बावजूद विद्यालय स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया। पिता ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने, बच्चे की काउंसलिंग कराने और विद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।
सदरपुर थानाध्यक्ष आशुतोष मिश्र ने बताया कि उन्हें प्रकरण की जानकारी नहीं मिली है और थाने में अभी कोई प्रार्थनापत्र प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विद्यालय प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
बाल यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में बच्चे की पहचान गोपनीय रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है। ऐसे मामलों में पुलिस को बाल हितैषी प्रक्रिया अपनाते हुए बयान दर्ज करना होता है। आरोप सही पाए जाने पर पॉक्सो अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। आरोप लगाने वाले और कथित रूप से शामिल सभी बच्चे नाबालिग बताए जा रहे हैं, इसलिए जांच एवं आगे की प्रक्रिया में किशोर न्याय कानून के प्रावधान भी महत्वपूर्ण होंगे।
इसी बीच सिद्धार्थनगर जिले के मिश्रौलिया थाना क्षेत्र से भी एक नाबालिग के यौन शोषण का मामला सामने आया है। पीड़िता के पिता की शिकायत पर अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पिता का आरोप है कि पहले थाना और पुलिस अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोनों घटनाओं ने आवासीय संस्थानों और घरों में बच्चों की सुरक्षा, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई तथा पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत को एक बार फिर रेखांकित किया है।