Hospice. धर्मशाला। देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में विजिलेंस थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद विजिलेंस विभाग ने अपनी जांच तेज कर दी है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आ रहा है कि जरूरतमंदों को शिक्षा, चिकित्सा और गोशाला निर्माण के नाम पर जो आर्थिक सहायता दी गई, उसे कथित तौर पर बाद में वापस ले लिया गया। विजिलेंस की टीम फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी या ऐच्छिक निधि से वितरित की गई धनराशि किन-किन लोगों को, किस उद्देश्य से और किस माध्यम से दी गई थी। जांच अधिकारी दस्तावेजों का बारीकी से मिलान कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों मेडिकल, एजुकेशन या फिर किन मसलों में हुआ हुआ है या नहीं। इसके लिए उन सभी लाभार्थियों की सूची तैयार की जा रही है, जिन्हें कथित रूप से सहायता राशि प्राप्त हुई थी।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि करीब 16 लाभार्थियों को 40 हजार से 50 हजार रुपए तक की आर्थिक मदद दी गई थी। यह राशि मुख्य रूप से चिकित्सा शिक्षा, सामान्य शिक्षा और गोशाला निर्माण जैसे सामाजिक कार्र्यों के लिए आबंटित की गई थी। आरोप है कि कुछ मामलों में पैसा देने के बाद लाभार्थियों से वापस ले लिया गया। विजिलेंस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि सहायता राशि देने की वास्तविक प्रक्रिया क्या थी और इसमें किस स्तर पर अनियमितता या नियमों का उल्लंघन किया गया। उधर, पूर्व विधायक के खिलाफ चल रही इस कार्रवाई से राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस अधिकारी लेन-देन के हर पहलू की जांच कर रहे हैं। इसमें बैंक खातों के रिकॉर्ड, ट्रांसफर डिटेल और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि क्या वित्तीय लेन-देन में किसी स्थापित सरकारी नियम या प्रक्रिया की अनदेखी की गई है।