पाकिस्तान में गहराया ऊर्जा संकट एलपीजी की कालाबाजारी से खाना पकाना हुआ भारी"
इस्लामाबाद : पाकिस्तान में आर्थिक तंगी के बीच आम नागरिकों पर एक नया संकट टूट पड़ा है। देश भर में तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) डीलरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और आपूर्ति व्यवस्था बाधित होने के कारण रसोई गैस की भीषण किल्लत पैदा हो गई है। गैस की उपलब्धता न के बराबर होने से खाना पकाने वाले ईंधन के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे आम लोगों के लिए दो वक्त का खाना पकाना भी चुनौती बन गया है।
1. 6,000 से अधिक आउटलेट्स बंद, आपूर्ति व्यवस्था ठप
एलपीजी डीलर्स एसोसिएशन के आह्वान पर लाहौर, कराची, पेशावर और इस्लामाबाद समेत देश के प्रमुख शहरों में लगभग 6,000 रिटेल आउटलेट्स बंद हो चुके हैं। डीलरों का आरोप है कि तेल एवं गैस नियामक प्राधिकरण (OGRA) की दोषपूर्ण नीतियों और स्थानीय प्रशासन के अनुचित दबाव के कारण वे कारोबार जारी रखने में असमर्थ हैं। Dealership बंद होने से थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर एलपीजी की वितरण श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है।
2. प्रति किलोग्राम ₹600 से ₹750 तक पहुंची दरें
मांग और आपूर्ति में भारी अंतर का फायदा उठाते हुए खुले बाजार में एलपीजी की कालाबाजारी शुरू हो गई है।खुदरा कीमतें जो एलपीजी पहले ₹250 से ₹280 प्रति किलोग्राम में उपलब्ध थी, वह अब ₹500 से ₹750 प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है।सिलिंडर के दाम12 किलोग्राम का घरेलू एलपीजी सिलिंडर, जो पहले लगभग ₹4,500 में मिलता था, वह अब ₹7,000 से ₹7,500 तक पहुंच गया है। वहीं सुदूर और पहाड़ी क्षेत्रों (जैसे स्कर्दू) में इसकी कीमत ₹8,200 के पार जा चुकी है।
3. ईरान सीमा पर फंसे सैकड़ों टैंकर
स्थानीय डीलरों की हड़ताल के साथ-साथ सीमा पार से आपूर्ति ठप होना भी इस संकट की बड़ी वजह है। पाकिस्तान अपनी दैनिक एलपीजी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा ईरान से आयात करता है। ताफ्तान सीमा पार से आवाजाही बाधित होने के कारण सैकड़ों एलपीजी टैंकर सीमा पर फंसे हुए हैं, जिससे देश के अंदर गैस प्रोसेसिंग और बॉटलिंग प्लांट्स को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है।
4. होटलों और ढाबों पर ताले, लकड़ी का सहारा लेने को मजबूर लोग
रसोई गैस की अनुपलब्धता का सीधा असर आम घरों के साथ-साथ छोटे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर पड़ा है:व्यवसाय प्रभावित: गैस न मिलने से कई ढाबों, रेस्टोरेंट और बेकरियों ने अपनी दरें काफी बढ़ा दी हैं या फिर परिचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।वैकल्पिक ईंधन ग्रामीण और निचले-मध्यम वर्गीय शहरी इलाकों में लोग लकड़ी, कोयले और सूखे पत्तों पर खाना पकाने के लिए मजबूर हैं। इसके चलते कोयले की दरें भी ₹40 से बढ़कर ₹60 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।
5. सर्दियों से पहले संकट गहराने की चेतावनी
पाकिस्तान में लगातार बढ़ रही महंगाई के बीच इस संकट ने जन-आक्रोश को और भड़का दिया है। उपभोक्ता संगठनों और व्यापारिक निकायों ने सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीमा पार व्यापार को तुरंत बहाल नहीं किया गया और डीलरों के साथ बातचीत कर हड़ताल समाप्त नहीं कराई गई, तो आगामी सर्दियों में जब गैस की मांग बढ़ेगी, तब यह ऊर्जा संकट और भयानक रूप ले सकता है।