वाशिंगटन: नए H-1B वीज़ा आवेदनों पर ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाई गई 1,00,000 डॉलर की फीस को चुनौती देने वाले नियोक्ताओं और कर्मचारियों ने कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द अंतिम फैसला सुनाएं। वहीं, सरकार चाहती है कि जब तक अपीलीय अदालत कोई फैसला नहीं सुना देती, तब तक इस मामले को रोक दिया जाए।
20 अक्टूबर को 'ग्लोबल नर्स फोर्स बनाम ट्रम्प' मामले में दायर अपने संयुक्त 'केस मैनेजमेंट स्टेटमेंट' में, वादियों ने कहा कि वे "H-1B वीज़ा आवेदनों की प्रक्रिया और अमेरिका में प्रवेश की शर्त के रूप में 1,00,000 डॉलर के भुगतान की अनिवार्यता की वैधता को चुनौती देते हैं।"
30 सितंबर को, जज गिलियम ने वादियों की 'प्रारंभिक निषेधाज्ञा' की मांग को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया, सरकार की 'मामला खारिज करने' की अर्जी को ठुकरा दिया, और 'क्लास सर्टिफिकेशन' (सामूहिक मुकदमे की मान्यता) की मांग को भी खारिज कर दिया (हालांकि इसमें भविष्य में दोबारा आवेदन करने की गुंजाइश रखी गई है)।
सरकार ने 9 अक्टूबर को 'नाइंथ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स' (अपीलीय अदालत) में अपील दायर की और उसी दिन जिला अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की। फाइलिंग के अनुसार, इस रोक (stay) की अर्जी पर 14 जनवरी, 2027 को सुनवाई होनी है।
वादियों ने प्रस्ताव दिया कि सरकार 3 नवंबर तक प्रशासनिक रिकॉर्ड पेश करे।
बयान में कहा गया है, "वादी इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि प्रतिवादी (सरकार) इस अदालत के 30 सितंबर, 2026 के आदेश का पालन कर रहे हैं या नहीं; यदि आवश्यक हुआ, तो वे इस आदेश को लागू करवाने की मांग कर सकते हैं।"
सरकार ने तर्क दिया कि अभी आगे बढ़ना समय की बर्बादी होगी। सरकार का कहना है कि "जब तक नाइंथ सर्किट कोर्ट अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) से जुड़े शुरुआती मुद्दों पर विचार कर रही है, तब तक आगे की कानूनी कार्यवाही करना उचित नहीं है।"
सरकार ने प्रस्ताव दिया कि रिकॉर्ड केवल अपीलीय अदालत के फैसले के 30 दिन बाद, या रोक (stay) की मांग को खारिज करने वाले किसी भी आदेश के 30 दिन बाद ही पेश किया जाए।
सरकार ने मैसाचुसेट्स के एक अलग फैसले की ओर भी इशारा किया। सरकार ने कहा, "मैसाचुसेट्स जिला अदालत द्वारा जारी 'यूनिवर्सल निषेधाज्ञा' को देखते हुए, इस मामले के नतीजे से मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा।" सरकार ने आगे कहा कि इस तरह की कानूनी कार्यवाही "केवल दोनों पक्षों और अदालत के संसाधनों को बर्बाद करती है, और इससे एक जैसी अपील दोबारा दायर होने की स्थिति बन सकती है।" इस फाइलिंग में शुल्क से जुड़ी दो अन्य लंबित अपीलों का उल्लेख है: फर्स्ट सर्किट में 'कैलिफोर्निया बनाम मुलिन' और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट में 'चैंबर ऑफ कॉमर्स बनाम DHS' - जिस पर 9 मार्च, 2026 को बहस हुई थी।
पक्षों के अनुसार, मुख्य कानूनी मुद्दे यह हैं कि क्या राष्ट्रपति की उद्घोषणा और उसके विस्तार 'अल्ट्रा वायर्स' (अधिकार क्षेत्र से बाहर) हैं, और क्या इसे लागू करने के लिए स्टेट डिपार्टमेंट और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा उठाए गए कदम 'एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसीजर एक्ट' का उल्लंघन करते हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 19 सितंबर, 2025 को हस्ताक्षरित 'उद्घोषणा 10973' के माध्यम से यह शुल्क लागू किया था। उन्होंने 18 सितंबर, 2026 को 'उद्घोषणा 11069' के जरिए इसे आगे बढ़ा दिया।
वादी पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले समूहों में 'जस्टिस एक्शन सेंटर', 'डेमोक्रेसी फॉरवर्ड', 'साउथ एशियन अमेरिकन जस्टिस कोलैबोरेटिव' (SAAJCO) और लॉ फर्म 'कोहेन मिलस्टीन सेलर्स एंड टोल' शामिल हैं।