ग्लासगो/इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की कथित हत्या को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र, भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। मिर्जा का दावा है कि एक नागरिक के घर पर कथित रूप से रॉकेट या ग्रेनेड से हमला किया गया, जिसमें तीन बच्चों समेत परिवार के पांच सदस्यों की जान चली गई। उन्होंने इस घटना को नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की अपील की है। हालांकि, हमले की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।स्कॉटलैंड के ग्लासगो से शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को जारी एक बयान में जम्मू कश्मीर तहरीक-ए-इत्तिफाक-ए-राय के अध्यक्ष अमजद अयूब मिर्जा ने कहा कि PoJK में नागरिकों के खिलाफ हिंसा की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। उनका आरोप है कि इलाके में लंबे समय से तनाव और सुरक्षा बलों की गतिविधियों के कारण आम नागरिकों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पांच लोगों की कथित मौत के मामले में केवल निंदा पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।मिर्जा के बयान में मृतकों की पहचान 12 वर्षीय हारिस, 8 वर्षीय मलाइका और 15 वर्षीय अनिका के रूप में की गई है। इनके अलावा बच्चों की मां शाजिया और दादी नसीबा की भी जान जाने का दावा किया गया है। स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि परिवार के घर पर एक विस्फोटक प्रक्षेप्य गिरा, जिससे पांचों सदस्यों की मौत हो गई।
प्रारंभिक आरोपों में हमले के दौरान बेलारूस में विकसित MM-60 रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड लॉन्चर के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। हालांकि, मिर्जा के बयान में भी स्वीकार किया गया है कि कथित हमले में इस्तेमाल हथियार, घटना की वास्तविक परिस्थितियां और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। ऐसे में किसी सुरक्षा एजेंसी या संगठन को सीधे जिम्मेदार ठहराना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि बच्चों और महिलाओं की मौत के आरोप अत्यंत गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आग्रह किया कि वे घटनास्थल से जुड़े प्रमाणों की जांच करें और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में कदम उठाएं। मिर्जा के अनुसार, यदि इस प्रकार की घटनाओं की जांच नहीं की गई तो क्षेत्र में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ सकती हैं।अपने बयान में उन्होंने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के वरिष्ठ सदस्यों उमर नजीर कश्मीरी, मुजतबा फारूकी और इम्तियाज असलम के आरोपों का भी उल्लेख किया। इन नेताओं का दावा है कि 5 जून 2026 से PoJK में 100 से अधिक युवाओं की मौत हुई है, सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और हजारों लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें संबंधित कार्यकर्ताओं के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मिर्जा के अनुसार, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों से लोकतांत्रिक अधिकारों, आर्थिक समस्याओं और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है। संगठन के नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जनता की मांगों को सामने लाने के लिए चलाया जा रहा है। इन मांगों में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा, आर्थिक राहत और सरकारी निर्णयों में पारदर्शिता जैसे विषय शामिल हैं।कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने अपनी चिंताओं को संयुक्त राष्ट्र और कई देशों की सरकारों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। इनमें तुर्किये, ईरान, सऊदी अरब, अमेरिका, कनाडा और स्विट्जरलैंड जैसे देश शामिल बताए गए हैं। उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करना और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए समर्थन प्राप्त करना है।मिर्जा के बयान में पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक रेंजर्स की कथित गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि PoJK के कुछ हिस्सों में सुरक्षा बलों ने प्रवेश मार्गों पर अवरोधक लगाए हैं और लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके अलावा आवश्यक खाद्य सामग्री और दवाइयों की आपूर्ति बाधित होने के आरोप भी लगाए गए हैं।कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि आम नागरिकों को भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है, तो इससे मानवीय संकट गहरा सकता है। उन्होंने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच प्रदान की जाए, ताकि जरूरतमंद लोगों की सहायता की जा सके।
बयान में पुंछ और बाग के कुछ क्षेत्रों में ड्रोन गतिविधियों तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाकर कथित स्नाइपर फायरिंग की खबरों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। मिर्जा ने कहा कि घनी आबादी वाले नागरिक क्षेत्रों में सैन्य हथियारों के कथित इस्तेमाल की जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार की जानी चाहिए।उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र, अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC), इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और विभिन्न देशों की सरकारों से स्थिति का संज्ञान लेने की अपील की है। उनकी प्रमुख मांगों में नागरिकों की कथित मौतों की स्वतंत्र जांच, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई शामिल है।इसके अतिरिक्त उन्होंने हिरासत में रखे गए व्यक्तियों के ठिकानों और उनकी कानूनी स्थिति की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को अपने परिजनों के बारे में जानकारी मिलना और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच सुनिश्चित होना आवश्यक है।इससे पहले भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र के मंच पर PoJK में प्रदर्शनकारियों की कथित मौतों और मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताई थी। 15 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत के प्रतिनिधि अनुज स्वरूप ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान हुई कथित मौतों की निष्पक्ष जांच, हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया और इंटरनेट सेवाओं की बहाली का मुद्दा उठाया था।
वहीं, जम्मू कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी की अक्टूबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी PoJK में मौतों, गिरफ्तारियों और संचार संबंधी प्रतिबंधों के आरोपों का उल्लेख किया गया था। हालांकि, उस रिपोर्ट ने सभी मौतों के लिए किसी एक पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया है और अलग-अलग घटनाओं की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।फिलहाल पांच नागरिकों की कथित हत्या को लेकर अमजद अयूब मिर्जा की अपील ने एक बार फिर PoJK में मानवाधिकारों और नागरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। मामले में निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना कैसे हुई, किस हथियार का इस्तेमाल किया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। मिर्जा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वह पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और भविष्य में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए।
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