ल्हासा/धर्मशाला : 30 अक्टूबर 2026। तिब्बत में मानवाधिकार और न्याय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। जेल में बंद तिब्बती व्यवसायी दोर्जे ताशी की बहन गोनपो क्यी ने अपने भाई के लिए न्याय की मांग करते हुए ल्हासा में नया शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया है। रिपोर्टों के अनुसार, गोनपो क्यी ने 26 अक्टूबर को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उच्च जन न्यायालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने अपने भाई को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा की समीक्षा करने, मामले की दोबारा सुनवाई कराने और वकील को मुकदमे से संबंधित दस्तावेज देखने की अनुमति देने की मांग की। उनके प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
तिब्बत से संबंधित समाचार संस्थान फयुल की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, गोनपो क्यी लंबे समय से अपने भाई के लिए न्याय की मांग कर रही हैं। उन्होंने इससे पहले भी ल्हासा में सरकारी कार्यालयों, पुलिस थानों, अदालतों और जेल के बाहर धरना-प्रदर्शन किए हैं। कई मौकों पर उन्होंने भूख हड़ताल और प्रार्थना के माध्यम से भी विरोध जताया है। इसके बावजूद उनके भाई के मामले में अब तक कोई ऐसा निर्णय सामने नहीं आया है जिससे परिवार की प्रमुख मांगें पूरी हो सकें।गोनपो क्यी ने ताजा प्रदर्शन के दौरान अपने हाथों में एक आवेदन पत्र भी लिया हुआ था। तिब्बत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पत्र में दो प्रमुख मांगें रखी गई थीं। पहली मांग यह थी कि दोर्जे ताशी के वकील को मुकदमे की फाइलों का निरीक्षण करने दिया जाए। दूसरी मांग थी कि अदालत उनके भाई की सजा की समीक्षा करे और मामले की नए सिरे से सुनवाई सुनिश्चित करे।
दोर्जे ताशी तिब्बत के एक प्रमुख व्यवसायी रहे हैं। वह ल्हासा स्थित याक होटल सहित विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े थे। उन्होंने होटल और रियल एस्टेट कारोबार में पहचान बनाई थी। इसके अतिरिक्त वह सामाजिक और परोपकारी गतिविधियों में भी सक्रिय रहे थे। हालांकि, वर्ष 2008 में तिब्बत में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद चीनी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, गिरफ्तारी के शुरुआती दौर में दोर्जे ताशी पर प्रदर्शनकारियों की सहायता करने और दलाई लामा से संबंध रखने जैसे आरोप लगाए गए थे। बाद में उनके खिलाफ ऋण धोखाधड़ी का मामला चलाया गया। वर्ष 2010 में ल्हासा की एक अदालत ने उन्हें लगभग 15 लाख युआन से संबंधित कथित ऋण धोखाधड़ी के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
परिवार और मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि दोर्जे ताशी के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार थे और मुकदमे की कार्यवाही निष्पक्ष नहीं थी। हालांकि, चीनी अधिकारियों ने उन्हें धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया था। दोनों पक्षों के दावों के बीच विवाद बना हुआ है।गोनपो क्यी का कहना है कि उनके भाई ने कोई ऐसा अपराध नहीं किया जिसके लिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी जाए। वह वर्षों से मुकदमे की दोबारा समीक्षा और निष्पक्ष न्यायिक सुनवाई की मांग कर रही हैं। उनका आरोप है कि न्याय की मांग उठाने पर उन्हें कई बार अधिकारियों के दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत ने भी पिछले वर्षों में गोनपो क्यी के विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, जनवरी 2023 में उन्होंने ल्हासा स्थित उच्च जन न्यायालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उस समय सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें वहां से हटाया और कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था।गोनपो क्यी और उनके परिवार ने जेल में दोर्जे ताशी से मिलने पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। अक्टूबर 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, दोर्जे ताशी के वकील वांग फेई ने जेल प्रशासन द्वारा मुलाकात की अनुमति नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए थे।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि वकील को अपने मुवक्किल से मिलने से इसलिए रोका गया क्योंकि उन्होंने पहले परिवार को जेल में कथित मारपीट की जानकारी दी थी। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। वकील ने अधिकारियों से मुलाकात रोकने के फैसले का लिखित कारण बताने और उसके कानूनी आधार को स्पष्ट करने की मांग की थी।तिब्बत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गोनपो क्यी और उनके एक अन्य भाई दोर्जे त्सेतन को करीब छह वर्षों से दोर्जे ताशी से मिलने की अनुमति नहीं मिली है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि दोर्जे ताशी की पत्नी और बच्चों को पिछले दो वर्षों से उनसे मिलने नहीं दिया गया। परिवार इन प्रतिबंधों को अन्यायपूर्ण बताते हुए अधिकारियों से मुलाकात की अनुमति मांग रहा है।
गोनपो क्यी ने जून 2026 में भी उच्च न्यायालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने उस समय आरोप लगाया था कि अधिकारियों द्वारा कानून का निष्पक्ष रूप से पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही की मांग उठाई थी।इस पूरे मामले में तिब्बती मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। संगठनों का कहना है कि किसी भी कैदी को कानूनी सहायता और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का अवसर मिलना चाहिए। इसके अतिरिक्त परिवार से संपर्क और वकील से मुलाकात के अधिकारों की रक्षा भी आवश्यक है।गोनपो क्यी के लगातार प्रदर्शनों को तिब्बत में न्याय की मांग करने वाले परिवारों के सामने आने वाली कठिनाइयों के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। उनके समर्थकों के अनुसार, शांतिपूर्ण तरीके से शिकायत दर्ज कराने और न्यायिक पुनर्विचार की मांग करने का अवसर उपलब्ध होना चाहिए।
हालांकि, चीन तिब्बत में अपनी नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था को कानून तथा क्षेत्रीय स्थिरता के अनुरूप बताता रहा है। दोर्जे ताशी के मामले में हालिया प्रदर्शन और परिवार द्वारा लगाए गए नए आरोपों पर चीनी अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।अब गोनपो क्यी की प्रमुख मांग है कि उनके भाई के मुकदमे की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और उनके वकील को सभी आवश्यक न्यायिक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही परिवार जेल में बंद दोर्जे ताशी से मुलाकात का अवसर भी चाहता है।फिलहाल 26 अक्टूबर को हुए नए विरोध प्रदर्शन के बाद अदालत द्वारा किसी नई सुनवाई की तारीख या पुनर्विचार संबंधी आदेश की पुष्टि नहीं हुई है। लगभग 18 वर्षों से जेल में बंद दोर्जे ताशी के मामले में उनकी बहन का संघर्ष जारी है।
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