नई दिल्ली : भारत की राजधानी नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) के आयोजन के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और रूस की स्टेट ड्यूमा (निचले सदन) के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय संवाद का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के संसदीय तंत्र के बीच सहयोग को बढ़ाना, बजटीय व विधायी अनुभवों का आदान-प्रदान करना और अंतर-संसदीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना रहा।
संसदीय कूटनीति और जन-केंद्रित विकास पर विशेष बल
मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने वैश्विक अनिश्चितता के दौर में संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के केंद्रीय विषय **"जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना"** पर चर्चा करते हुए नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और संसदें आम नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने और कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। दोनों सदनों के बीच संस्थागत संवाद को निरंतर जारी रखने पर भी सहमति बनी।
आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी को विधायी समर्थन
बैठक में भारत और रूस के बीच विशेष व विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी (Special and Privileged Strategic Partnership) के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन) द्वारा तय किए गए रणनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक लक्ष्यों को विधायी व संसदीय ढांचा प्रदान करने के लिए अंतर-संसदीय आयोग (Inter-Parliamentary Commission) के ढांचे को और अधिक सक्रिय बनाने की बात कही गई। इसके माध्यम से व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गति मिलेगी।
संसदीय मैत्री समूहों और डिजिटल पहलों का विस्तार
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भारत द्वारा वैश्विक स्तर पर संसदीय मैत्री समूहों (Parliamentary Friendship Groups) के गठन और विस्तार की पहल को रेखांकित किया। उन्होंने दोनों देशों के सांसदों और संसदीय समितियों (विशेषकर अंतरराष्ट्रीय मामलों की समितियों) के बीच नियमित आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण (Capacity Building) पर जोर दिया। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल परिवर्तन और संस्थागत पारदर्शिता के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के साझाकरण पर सहमति व्यक्त की गई।
वैश्विक मंचों पर भारत-रूस बहुपक्षीय सहयोग का संकल्प
ब्रिक्स, जी-20 और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और रूस के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। वोलोदिन ने भारत के समृद्ध लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों का संसदीय सहयोग वैश्विक शांति, स्थिरता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) को बढ़ावा देने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। बैठक के समापन पर दोनों पक्षों ने आगामी वर्षों में संसदीय शिष्टमंडलों के आदान-प्रदान को और अधिक तेज करने का निर्णय लिया।