सीनेट में बदलेगा सत्ता का समीकरण? डेमोक्रेट्स की जीत पर बढ़ा बाजार का भरोसा
सट्टा बाजार में डेमोक्रेट्स का पलड़ा भारी
वॉशिंगटन: अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है। चुनावी परिणामों पर दांव लगाने वाले प्रेडिक्शन मार्केट में डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस के दोनों सदनों में बढ़त मिलती नजर आ रही है। प्रतिनिधि सभा में उसकी स्थिति ज्यादा मजबूत है, जबकि सीनेट में मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी बना हुआ है। हालांकि, ये बाजार आधारित संभावनाएं हैं और इन्हें चुनाव का निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।
कालशी के 27 अक्टूबर के उपलब्ध आंकड़ों में डेमोक्रेट्स के सीनेट पर नियंत्रण हासिल करने की संभावना करीब 63 प्रतिशत दिखाई गई। पॉलीमार्केट पर यह संभावना लगभग 67 प्रतिशत थी। दोनों मंचों के आंकड़े संकेत देते हैं कि कारोबारियों का झुकाव डेमोक्रेटिक जीत की ओर है। फिर भी रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत बचाने की संभावना खत्म नहीं हुई है। मतदान से पहले नई खबरों और कारोबार के साथ ये अनुमान बदल सकते हैं।
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स का पलड़ा ज्यादा भारी
अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावनाएं सीनेट के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही हैं। कालशी के 27 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार, पार्टी के सदन पर नियंत्रण हासिल करने की संभावना लगभग 91 प्रतिशत थी। इसका अर्थ है कि बाजार में भाग लेने वाले लोग इस परिणाम को ज्यादा संभावित मान रहे हैं। यह मतदाताओं के समर्थन का प्रतिशत या पार्टी को मिलने वाले वोटों का अनुमान नहीं है। प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों के लिए चुनाव होगा और सामान्य बहुमत के लिए 218 सीटें चाहिए। फिलहाल कांग्रेस के दोनों सदनों पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है। यदि प्रतिनिधि सभा डेमोक्रेट्स के हाथ में जाती है तो ट्रंप प्रशासन को विधायी प्रस्ताव आगे बढ़ाने के लिए विपक्ष के साथ अधिक बातचीत करनी पड़ सकती है। दोनों सदनों में बहुमत बदलने पर राष्ट्रपति के शेष कार्यकाल के राजनीतिक समीकरण और जटिल हो जाएंगे।
सीनेट में चार सीटों का शुद्ध फायदा जरूरी
सीनेट की लड़ाई इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कुछ सीटों का बदलाव पूरे सदन का नियंत्रण तय कर सकता है। मौजूदा स्थिति में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें हैं। डेमोक्रेट्स और उनके साथ संसदीय समूह में शामिल निर्दलीयों की संयुक्त संख्या 47 है। इस बार विशेष चुनावों सहित सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होना है। डेमोक्रेटिक खेमे को अपनी मौजूदा स्थिति बचाते हुए कम से कम चार सीटों का शुद्ध फायदा हासिल करना होगा। यही गणित डेमोक्रेट्स की राह को चुनौतीपूर्ण बनाता है। विपक्ष को केवल रिपब्लिकन सीटें जीतने पर ध्यान नहीं देना है, बल्कि अपने कब्जे वाली प्रतिस्पर्धी सीटें भी बचानी होंगी। यदि किसी मौजूदा सीट पर हार होती है तो उसकी भरपाई के लिए दूसरी जगह अतिरिक्त जीत जरूरी होगी। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर अनुकूल माहौल दिखाई देने के बावजूद सीनेट में बहुमत का फैसला अलग-अलग राज्यों के नतीजों से होगा। रिपब्लिकन पार्टी के लिए कुछ अहम मुकाबले बचा लेना भी निर्णायक साबित हो सकता है।
टेक्सास, ओहायो और मेन पर नजर
प्रेडिक्शन मार्केट में कई महत्वपूर्ण राज्यों के मुकाबले डेमोक्रेट्स के लिए संभावनाएं दिखा रहे हैं। पॉलीमार्केट के उपलब्ध आंकड़ों में टेक्सास में डेमोक्रेट उम्मीदवार जेम्स टैलारिको की जीत की संभावना लगभग 68 प्रतिशत और ओहायो में शेरॉड ब्राउन की करीब 70 प्रतिशत दिखाई गई। मेन में ट्रॉय जैक्सन के लिए लगभग 63 प्रतिशत संभावना दर्ज थी। ये आंकड़े संबंधित उम्मीदवारों की जीत पर बाजार के आकलन को दर्शाते हैं, उनके अनुमानित वोट प्रतिशत को नहीं। इन मुकाबलों की दिशा सीनेट के अंतिम समीकरण पर असर डाल सकती है। किसी राज्य में उम्मीदवार की व्यक्तिगत लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दे, प्रचार की प्रभावशीलता और मतदान के दिन समर्थकों की भागीदारी परिणाम बदल सकती है। इसी कारण किसी एक मंच पर दिखाई देने वाली बढ़त को सुरक्षित सीट का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। डेमोक्रेट्स के लिए अनुकूल अनुमान उत्साह बढ़ाने वाले हैं, लेकिन चुनाव जीतने के लिए उन्हें उस संभावना को वास्तविक मतों में बदलना होगा।
बहुमत बदला तो ट्रंप की चुनौतियां बढ़ेंगी
कांग्रेस में विपक्ष का नियंत्रण बढ़ने पर ट्रंप प्रशासन को कानून पारित कराने, सरकारी खर्च पर सहमति बनाने और अपनी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में अधिक राजनीतिक मोलभाव करना पड़ सकता है। सीनेट में बहुमत बदलने का असर प्रशासनिक और न्यायिक नियुक्तियों की पुष्टि की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। ऐसे परिदृश्य में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच सहयोग तथा टकराव, दोनों की अहमियत बढ़ जाएगी। मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस का बहुमत बदलने से राष्ट्रपति का पद नहीं बदलता। इन चुनावों का सीधा सवाल यह है कि ट्रंप के बाकी कार्यकाल में संसद के दोनों सदनों पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा। डेमोक्रेटिक बहुमत की स्थिति में राष्ट्रपति की नीतियों की संसदीय जांच और निगरानी बढ़ सकती है। वहीं रिपब्लिकन पार्टी सीनेट बचा लेती है तो वह प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक सहारा बना रहेगा।
बाजार के अनुमान और मतपेटी का फैसला अलग
प्रेडिक्शन मार्केट में लोग किसी घटना के होने या नहीं होने से जुड़े अनुबंध खरीदते और बेचते हैं। कालशी के अनुसार, किसी परिणाम से जुड़ा अनुबंध सही साबित होने पर एक डॉलर का भुगतान करता है। उसकी बाजार कीमत को उस परिणाम की अनुमानित संभावना के रूप में पढ़ा जाता है। खरीद-बिक्री के साथ कीमत बदलती है, इसलिए एक ही दिन के अलग-अलग समय पर आंकड़ों में अंतर दिखाई दे सकता है। बाजार की संभावना को जनमत सर्वेक्षण के बराबर समझना भी सही नहीं होगा। सर्वेक्षण मतदाताओं से उनकी पसंद पूछता है, जबकि बाजार में भाग लेने वाले उपलब्ध जानकारी के आधार पर परिणाम पर दांव लगाते हैं। लगभग 65 प्रतिशत संभावना का मतलब निश्चित जीत नहीं है; उसमें हार की पर्याप्त गुंजाइश भी मौजूद रहती है। फिलहाल संकेत डेमोक्रेट्स के पक्ष में हैं और रिपब्लिकन पार्टी पर दबाव है। लेकिन ट्रंप की पार्टी सीनेट का नियंत्रण खोएगी या बचा लेगी, इसका फैसला मतगणना के बाद ही होगा।